
प्रस्तावना
आजकल Forensic Science न्याय व्यवस्था का अभिन्न अंग बन गई है | उत्तर प्रदेश में आपराधिक न्याय व्यवस्था के अभिन्न हिस्से के रूप में जांच प्रक्रिया तेजी से बदल रही है | अब गवाहों की अनुपस्थिति या अभाव तथा परम्परागत साक्ष्य के तरीकों पर निर्भर होने के बजाय Forensic Science के उपयोग को प्रोत्साहन दिया जा रहा है |
इससे न सिर्फ साक्ष्यों का संकलन और जांच सटीकता से होती है बल्कि अपराधियों के बच निकलने की सम्भावनाएं भी कम होती हैं | DNA, fingerprint और digital forensic जैसी तकनीकों का विस्तार किया जा रहा है जो आपराधिक जांच को नई दिशा देते हैं |
आइए जानते हैं उत्तर प्रदेश Forensic Science के क्षेत्र में क्रांति के मामले में कैसे उत्तम प्रदेश बन रहा है |
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2026 में Forensic Science क्यों बना जांच का सबसे बड़ा आधार
Forensic Science vs पारंपरिक जांच प्रणाली
आपराधिक न्याय व्यवस्था में Forensic Science और पारंपरिक जांच प्रणाली से होने वाले न्याय में बहुत अधिक अंतर आ गया है |
जहाँ एक ओर पारंपरिक जांच प्रणाली मख्य रूप से गवाहों के बयान, पुलिस की पूछताछ और परिस्थिति जन्य साक्ष्यों पर आधारित होती है, वहीं दूसरी ओर Forensic Science आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों जैसे कि DNA विश्लेषण, Fingerprint, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, डिजिटल फॉरेंसिक आदि पर आधारित होती है |
पारंपरिक प्रणाली में मानवीय त्रुटि, पुलिसिया तथा राजनैतिक दबाव या गवाहों के मुकर जाने या किसी के दबाब में आ जाने की संभावना रहती है, जिससे अक्सर अपराधी बच जाते हैं तथा निर्दोष अनावश्यक रूप से फँस जाते हैं |
जिसके कारण न्याय व्यवस्था से आमलोगों का भरोसा उठने लगता है | लेकिन Forensic Science के जरिये न्यायालय में तथ्यों को अधिक सटीकता और पारदर्शिता से रखा जा सकता है |
जिससे न्यायालय में सत्य की स्थापना प्रबल हो जाती है तथा न्यायालय को उसके सामने उपस्थित तथ्यों के आधार पर सत्य ही खोजना होता है |
जिस कारण से अपराधियों के बच निकलने की सम्भावनाये कम हो जाती हैं तथा निर्दोष व्यक्तिओं को झूठे तथा मनगढंत तथ्यों के आधार पर फसाए जाने से मुक्ति मिलती है |
यही कारण है कि आज के समय में Forensic Science को न सिर्फ जांच के आधुनिक साधन के रूप में देखा जा रहा है बल्कि न्याय तथा सत्य की स्थापना का भी महत्वपूर्ण तथा प्रभावशाली साधन भी माना जा रहा है |
इसी का परिणाम है कि देश भर में Forensic Science की शिक्षा और कौशल को निरंतर बढ़ावा दिया जा रहा है | जो आपराधिक न्याय व्यवस्था के बेहतर भविष्य का संकेत है |
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Forensic Science का बढ़ता महत्व
आधुनिक आपराधिक न्याय व्यवस्था में Forensic Science का योगदान और महत्व दोनों ही तेजी से बढ़ रहे हैं | क्योंकि यह आपराधिक घटना की जांच को अधिक वैज्ञानिक,निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाती है |
न्याय व्यवस्था में पारंपरिक तरीकों की सीमाएं थी जिसमे गवाह या तो मुकर जाते थे या अपने बयान बदल देते थे जिससे न्याय संभव नहीं हो पाता था |
Forensic Science किसी घटना के तथ्यों के सम्बन्ध में अत्यधिक सटीक तथा प्रामाणिक साक्ष्य प्रदान करती है | Forensic Science में आज अनेक तकनीकें उपलब्ध हैं जो न केवल अपराधियों की सटीक पहचान करती हैं बल्कि निर्दोषों को गलत आरोपों से भी बचाती हैं |
भारत में लाये गए नए कानूनों में भी Forensic Science को बहुत महत्व दिया गया है जिससे न्यायालयों में भी Forensic Science की स्वीकार्यता तथा महत्व लगातार बढ़ रहा है |
यही कारण है कि भारतीय न्याय व्यवस्था में Forensic Science को आपराधिक जांचों की रीढ़ की हड्डी माना जा रहा है | यह न्याय व्यवस्था को अधिक विश्वसनीय और पारदर्शी बना रही है |
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Forensic Science की UP में जरूरत क्यों बढ़ी ?
उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य, जिसकी जनसंख्या लगभग 20 करोड़ से अधिक है, में अपराधों की संख्या स्वभाविक रूप से अधिक है |
ऐसी स्थिति में जांच के पुराने तरीकों पर निर्भर बने रहा कोई समझदारी नहीं है, क्यों कि आजकल अपराध सम्बंधीं चुनौतियां बहुत बढ़ गई हैं जिनका प्रबंधन सिर्फ और सिर्फ आधुनिक Forensic Science तकनीकों के माध्यम से ही किया जाना संभव है |
इस प्रकार बढ़ती आबादी और आपराधिक दबाब के बीच Forensic Science तकनीकें उत्तर प्रदेश में अपराध न्याय व्यवस्था की अनिवार्यता बन गई है |
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Forensic Science आधारित Crime Scene Investigation
Evidence Collection के तरीके
किसी भी अपराध के बाद साक्ष्य संकलन एक वैज्ञानिक तथा कानूनी प्रक्रिया है, जिसमे घटना स्थल से विभिन्न प्रकार के साक्ष्य सावधानी पूर्वक संकलित किये जाते हैं | इनमे निम्न प्रकार के साक्ष्य शामिल हैं :
1. भौतिक साक्ष्य जैसे हथियार, खून के धब्बे और वस्तुएं ;
2. जैविक साक्ष्य जैसे DNA, रक्त, बाल और लार;
3 . डिजिटल साक्ष्य जैसे मोबाइल डेटा, कॉल रिकॉर्ड्स और CCTV फुटेज;
4. छाप साक्ष्य जैसे फिंगरप्रिंट, फुटप्रिंट और टायर मार्क;
5. ट्रेस साक्ष्य जैसे धूल, फाइबर और सूक्ष्म कण शामिल होते हैं।
इसके साथ ही घटना स्थल के फोटो, वीडियोग्राफी तथा नक़सानजरी का दस्तावेजीकरण किया जाता है | सम्पूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए चैन ऑफ़ कस्टडी का पालन किया जाता है | जिससे अदालत में साक्ष्यों की प्रमाणिकता बनी रहे तथा न्याय प्रभावी ढंग से सुनिश्चित किया जा सके |
माननीय सुप्रीम कोर्ट की विधि व्यवस्था Vijay Pandey v. State of Uttar Pradesh, (2019) 3 SCC 778 में स्थापित किया गया है कि उचित जप्ती तथा उचित चैन ऑफ़ कस्टडी के बिना न्यायालय में जप्ती संदेहास्पद मानी जाती है तथा साक्ष्य का मूल्य समाप्त हो जाता है |
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डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन का महत्व
आधुनिक अपराध जांच में डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन का महत्व तेजी से बढ़ रहा है | इसका उद्देश्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित, सटीक तथा छेड़-छाड़ रहित तरीके से संरक्षित करना है |
किसी आपराधिक घटना के बाद घटनास्थल की फोटो, वीडियो रिकॉर्डिंग, CCTV फुटेज, मोबाइल डेटा और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स के माध्यम से पूरी घटना का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाता है तथा विशेषज्ञों द्वारा उसका विश्लेषण किया जाता है |
साक्ष्य के विश्लेषण के बाद आई रिपोर्ट को न्यायालय में पुख्ता साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जाता है | डिजिटल साक्ष्यों का दस्तावेजीकरण तथा उचित संरक्षण और विश्लेषण न सिर्फ की पारदर्शिता तथा विश्वस्नीयता बढ़ाते हैं, बल्कि चैन ऑफ़ कस्टडी को भी मजबूत करता है जिससे साक्ष्य की विश्वस्नीयता और प्रमाणिकता न्यायालय के समक्ष टिकी रहे |
इससे न्याय की प्रक्रिया मजबूत होती है |
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Forensic Science में DNA Analysis की भूमिका
DNA से पहचान कैसे होती है ?
दुनिया में हर व्यक्ति का DNA पैटर्न अलग होता है सिवाय जुड़वा व्यक्तियों के | जांच के दौरान घटना स्थल से जैविक नमूने प्राप्त किये जाते हैं, जिसमे खून ,बाल, लार या त्वचा आदि की कोशिकाएं होती हैं जिमे से DNA अलग किया जाता है तथा प्रयोगशाला में उसका विश्लेषण करके DNA प्रोफाइल तैयार किया जाता है |
इस प्रोफाइल की तुलना अपराध में संलिप्त व्यक्ति के DNA से की जाती है | यदि दोनों दोनों का पैटर्न सामान होता है तो यह उस अपराधी व्यक्ति का मजबूत वैज्ञानिक सबूत बन जाता है | न्यायालयों में DNA को विश्वसनीय साक्ष्य के रूप में देखा जाता है |
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अदालत में DNA साक्ष्य की वैधता
भारतीय अदालतों में DNA साक्ष्य की वैधता सामान्यतः स्वीकार्य की जाती है, यदि साक्ष्य का संग्रह, संरक्षण और विश्लेषण विधि द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया गया हो |
DNA साक्ष्य को भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 45 के अंतर्गत विशेषज्ञ साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया जाता है,जहाँ Forensic Science विशेषज्ञ की रिपोर्ट तथा गवाही महत्वपूर्ण समझी जाती है |
लेकिन इसके लिए चैन ऑफ़ कस्टडी का पूरा रिकॉर्ड होना आवश्यक है,जिससे यह स्पष्ट हो सके कि साक्ष्य के साथ किसी प्रकार की छेड़ -छाड़ नहीं हुई है | न्यायालयों ने कई मामलों में स्थापित किया है कि DNA परीक्षण सच्चाई उजागर करने का सटीक और विश्वसनीय साधन है |
न्यायालयों ने कई मामलों में यह स्पष्ट किया है कि DNA परीक्षण सत्यता के निर्धारण में अत्यंत प्रभावी साधन है, लेकिन इसे अन्य साक्ष्यों के साथ समग्र रूप से देखा जाता है।
इस प्रकार DNA साक्ष्य की वैधता इस बात पर निर्भर करती है कि उसके संकलन, विश्लेषण और न्यायालय में प्रस्तुति के संबंधों में मानकों का उपयोग किया गया हो | मानकों का उपयोग करने के बाद ही उसको न्यायालय में प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाता है |
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Forensic Science को बढ़ावा देने में UPSIFS Lucknow की भूमिका
Uttar Pradesh State Institute of Forensic Sciences और शिक्षा
Uttar Pradesh State Institute of Forensic sciences (UPSIFS), Lucknow, India की स्थापना उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दिनांक 12 दिसंबर 2022 को की गई थी। उत्तर प्रदेश में Forensic Science की शिक्षा और प्रशिक्षण को सुदृढ़ बनाने में UPSIFS तेजी से आगे बढ़ रहा है |
यह संस्थान छात्रों को आधुनिक Forensic Science के क्षेत्र जैसे कि DNA प्रोफाइलिंग, साइबर फॉरेंसिक, डिजिटल साक्ष्य विश्लेषण और क्राइम सीन इन्वेस्टिगेशन आदि के बारे में सैद्धांतिक के साथ -साथ व्यवहारिक शिक्षा प्रदान करता है |
यहां B.Sc., M.Sc. और विशेष डिप्लोमा कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को न केवल अकादमिक ज्ञान दिया जाता है, बल्कि उन्हें आधुनिक प्रयोगशालाओं में वास्तविक स्थतियों का प्रशिक्षण भी दिया जाता है | जिससे वे सीधे पुलिस, न्यायालय और जांच एजेंसियों में काम करने के लिए तैयार हो सकें।
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UPSIFS में उपलब्ध पाठ्यक्रम इस प्रकार हैं:
(A) स्नातक और एकीकृत पाठ्यक्रम
1 .बी.एससी-एम.एससी फोरेंसिक विज्ञान: यह 5 वर्ष का एकीकृत पाठ्यक्रम है।
2 .बी.टेक-एम.टेक कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (साइबर सुरक्षा): यह भी 5 वर्ष का एकीकृत पाठ्यक्रम है तथा यह साइबर सुरक्षा और डिजिटल फोरेंसिक में सैद्धांतिक और व्यवहारिक पेशेवर तैयार करता है।
3. बी.एससी एलएल.बी (ऑनर्स) : यह पाठ्यक्रम कानून और विज्ञान का एक संगम है। जो मुख्य रूप से “Law with Lab” के सिद्धांत पर आधारित है |
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(B) स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम
- एम.एससी फोरेंसिक विज्ञान: यह 2 साल का पाठ्यक्रम है।
2. एलएलएम (आपराधिक कानून और आपराधिक न्याय प्रशासन): यह एक वर्षीय आपराधिक कानून में विशेषज्ञता सम्बंधित पाठ्यक्रम है।
3. एलएलएम (साइबर कानून और साइबर अपराध जांच): यह भी एक वर्षीय साइबर कानून और साइबर अपराध कानून में विशेषज्ञता सम्बंधित पाठ्यक्रम है। इन दोनों पाठ्यक्रमों के करने के दौरान छात्र NET की परिक्षा दे सकते हैं |
4. एम.टेक एआई और डेटा साइंस (साइबर सुरक्षा): कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा विज्ञान के साथ साइबर सुरक्षा में यह 2 वर्षीय पाठ्यक्रम है |
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(C) डिप्लोमा और प्रमाण पत्र
- पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन डीएनए फोरेंसिक: यह एक विशेष फ्लैगशिप प्रोग्राम है।
- साइबर फोरेंसिक में प्रमाण पत्र: यह एक साइबर खतरों और डिजिटल फोरेंसिक से जुड़ा उन्नत प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम है ।
- फोरेंसिक दस्तावेज़ परीक्षण में पीजी डिप्लोमा
- फोरेंसिक बैलिस्टिक्स में पीजी डिप्लोमा
इस प्रकार यह संस्थान शिक्षा और कौशल विकास के माध्यम से उत्तर प्रदेश की आपराधिक न्याय व्यवस्था को अधिक आधुनिक, वैज्ञानिक और भरोसेमंद बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है | उक्त पाठ्यक्रमों की पुष्टि तथा एडमिशन के लिए संस्था की ऑफिसियल वेबसाइट UPSIFS पर संपर्क कर सकते हैं |
शैक्षणिक साझेदारी के माध्यम से UPSIFS अपने छात्रों को प्रैक्टिकल एक्सपोजर देने के लिए केजीएमयू (KGMU), धीरूभाई अंबानी यूनिवर्सिटी और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) हस्ताक्षरित किये गए हैं |
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Experts की ट्रेनिंग
इस संस्थान UPSIFS में सिर्फ छात्रों को ही पढ़ाया और प्रशिक्षण नहीं दिया जाता है, बल्कि कानून प्रवर्तन अधिकरण के अधिकारियों और कर्मचारियों को भी नियमित प्रशिक्षण दिया जाता है |
जिसमे पुलिस तथा जांच प्रवर्तन अधिकरण के कर्मचारी और अधिकारी शामिल होते हैं | इसके अतिरिक्त जनचेतना के लिए ऑनलाइन कार्यक्रमों का प्रचार और प्रसार किया जाता है |
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The Shedo App का UPSIFS के छात्रों द्वारा निर्माण
UPSIFS के छात्रों के द्वारा बेटियों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए The Shedo App बनाया गया है | यह App मल्टी डाइमेंशनल है |
इसमें एक बटन दबाते ही खतरे के सम्बन्ध में सूचना नजदीकी व्यक्ति तक पहुंच जाती है | इससे न सिर्फ बेटियों को सुरक्षा का अहसास होगा बल्कि माँ -बाप भी चेन की सांस ले सकेंगे |
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UP में Forensic Science Labs का विस्तार (2026)
प्रयोगशालाओं की संख्या में वृद्धि
उत्तर प्रदेश में अपराध सम्बंधित चुनौतियों का सामना करने के लिए आधुनिक Forensic Science प्रयोगशालाओं की आवश्यकता है | उत्तर प्रदेश में 18 रेंज हैं | 12 फॉरेंसिक प्रयोगशालाएं पहले से हैं तथा 6 नई प्रयोगशालाओं पर काम चल रहा है |
जिला स्तर पर सुविधाएं
उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने UPSIFS में आयोजित एक कॉन्फ्रेंस में कहा कि वर्तमान की अपराध के क्षेत्र में वर्तमान चुनौतियों के अनुरूप हमें स्वयं को आधुनिक बनाना होगा |
इसके लिए 75 जिलों में मोबाइल Forensic यूनिट उपलब्ध कराई गई है | मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश में साइबर मुख्यालय बनाने पर विचार के बारे में भी बताया |
सभी 75 जनपदों में साइबर थानों की स्थापना की गई है | इसके अतिरिक्त 1587 थानों में हेल्प डेक्स की स्थापना की गई है जिसके लिए हर जिले में मास्टर ट्रेनर भेजे गए हैं |
डॉ जी के गोस्वामी IPS, संस्थापक निदेशक USIFS लखनऊ उत्तर प्रदेश द्वारा फेसबुक पेज पर दी गई सूचना के अनुसार प्रदेश के सभी 75 जिलों में तैयार हो रही है ‘ साइबर सिंघम ‘ की फौज |
जिसमे क्राइम सीन मैनेजमेंट से लेकर साइबर टेक्नोलॉजी तक की बारीकियां सीखेंगे अफसर | इसके अलावा उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्य नाथ के निर्देश पर प्रदेश भर के कमिश्नरेट और जनपदों के आरक्षी निरीक्षक तक को दी जा रही है स्पेशल ट्रेनिंग |
उत्तर प्रदेश में वैज्ञानिक पुलिसिंग को मजबूत बनाने के लिए 500 फॉरेंसिक एक्सपर्ट तैयार किए जा रहे हैं, जो Uttar Pradesh State Institute of Forensic Science (UPSIFS) से विशेष प्रशिक्षण लेकर हर जिले तक आधुनिक फॉरेंसिक जांच तकनीकों का प्रसार करेंगे, जिससे जांच प्रक्रिया अधिक सटीक, तेज और पारदर्शी बनेगी।
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मोबाइल फॉरेंसिक यूनिट:
नए कानून के अनुसार 7 वर्ष से अधिक सजा वाले अपराधों में फॉरेंसिक साक्ष्य अनिवार्य किए गए हैं, जिसके लिए उत्तर प्रदेश की सरकार द्वारा हर जनपद में मोबाइल फॉरेंसिक वैन उपलब्ध कराई जा रही है।
उत्तर प्रदेश के UPSIFS में आयोजित एक कॉन्फ्रेंस में माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने कहा कि वर्तमान की अपराध के क्षेत्र में वर्तमान चुनौतियों के अनुरूप हमें स्वयं को आधुनिक बनाना होगा |
मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश में साइबर मुख्यालय बनाने पर विचार के बारे में भी बताया | मुख्य मंत्री ने कहा कि हमें समय के अनुसार स्वयं को तैयार करना होगा |
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Digital Forensic Science और डिजिटल फॉरेंसिक का उपयोग
CCTV फुटेज, मोबाइल डाटा विश्लेषण
आधुनिक तकनीकी जिसमे डिजिटल फॉरेंसिक शामिल है ने अपराध की जांच को पूरी तरह बदल दिया है | अब CCTV फुटेज, मोबाइल डाटा, उन्नत डाटा एनालिसिस जांच आधुनिक अपराध जांच का अहम् हिस्सा बन चुके हैं, जिसके माध्यम से फोन चैट्स, और लोकेशन का पता लगाने के लिए लोकेशन चार्ट जैसी सूचनाओं का विश्लेषण करके सच्चाई को उजागर करना आसान हो गया है |
विशेषकर साइबर अपराधों में यह तकनीकी अच्छा काम कर रही है, क्यों कि डिजिटल साक्ष्य आरोपी की गतिविधयों का सटीक तथा मजबूत दस्तावेजी रिकॉर्ड उपलब्ध कराते हैं |
परिणाम स्वरुप आरोपियों के लिए उनके द्वारा किये गए कृत्यों के सम्बन्ध में साक्ष्य मिटाना या उनमे हेरा -फेरी करना पहले की तुलना में अधिक कठिन हो गया है, जिसके कारण जांच तथा उसके परिणाम अधिक प्रभावशाली तथा सटीक बन रही हैं | जो आरोपितों को उनके अंजाम तक पहुंचाने में अहम् भूमिका निभा रहे हैं |
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Digital Forensic Science से cyber crime control
डिजिटल तकनीकी का साइबर अपराध नियंत्रण में योगदान महत्वपूर्ण होता जा रहा है | जिसके तहत मोबाइल डाटा, IP एड्रेस ट्रैकिंग और मोबाइल पर सोशल मीडिया के रूप में गति-विधिओं का विश्लेषण कर अपराधियों को कम से कम समय में दबोचना संभव हो गया है |
भारत सरकार ने भी इस दिशा में तेजी से बढ़ते अपराधों पर नकेल कसने के लिए कई कार्यक्रम चालू किये हैं | इन पहलों में मुख्य रूप से Indian Cyber Crime Coordination Centre तथा National Cyber Crime Reporting Portal शामिल हैं |
गृह मंत्रालय ने साइबर क्राइम से निपटने के लिए भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की स्थापना नई दिल्ली में की है, यह एक साझा प्लेटफॉर्म है ताकि देश की सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों (LEAs) को साइबर अपराध से मिलकर और प्रभावी तरीके से सकें | यह केंद्र पूरे देश में साइबर अपराध को रोकने और नियंत्रित करने के लिए मुख्य भूमिका निभाता है |
National Cyber Crime Reporting Portal का उद्देश्य साइबर अपराध के पीड़ितों /शिकायतकर्ताओं को ऑनलाइन शिकायत करने की सुविधा प्रदान करना है |
यह पोर्टल ऑनलाइन लाइन अपराध, बाल योन शोषण और दुर्व्यवहार सामिग्री या योन रूप से स्पष्ट सामिग्री जैसे कि बलात्कार /सामूहिक बलात्कार से सम्बंधित शिकायतों के साथ -साथ मोबाइल अपराध, ऑनलाइन और सोशल मीडिया अपराध, ऑनलाइन, वित्तीय धोखाधड़ी, रैंसमवेयर, क्रिप्टोकर्रेंसी सम्बंधित अपराध तथा हैकिंग जैसे अन्य साइबर अपराधों को भी सम्हालता है |
यह बाल योन शोषण और दुर्व्यवहार सामिग्री या योन रूप से स्पष्ट सामिग्री जैसे कि बलात्कार /सामूहिक बलात्कार से सम्बंधित मामलों में गुमनाम शिकायत का भी विकल्प प्रदान करता है |
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न्याय प्रणाली में बदलाव
पारदर्शी जांच,निर्दोष की सुरक्षा तथा दोषियों को सजा में आसानी
Forensic Science के माध्यम से अपराधों की जांच पारदर्शी और निष्पक्ष रूप से संभव हो पाती है क्योंकि संकलित साक्ष्यों का विश्लेषण वैज्ञानिक तरीके से किया जाता है |
आधुनिक Forensic Science तकनीकी DNA परीक्षण, फिंगरप्रिंट, डिजिटल डेटा, CCTV फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्य तथ्यों की सत्यता को स्पष्ट रूप से सामने लाते हैं |
इसमें साक्ष्य संकलन से लेकर न्यायालय में प्रस्तुत करने तक चैन ऑफ़ कस्टडी के नियमों का पालन करते हुए तथा डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन से जांच सम्बंधित तथ्यों की न्यायालय के समक्ष विश्वस्नीयता बढ़ती है |
परिणाम स्वरुप न सिर्फ दोषियों का बचना मुश्किल होता है बल्कि निर्दोष व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा करना भी आसान हो जाता है | जिससे आमजन में पूरी आपराधिक न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास बढ़ता है |
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2026 में Forensic Science का कानूनी आधार
BNSS 2023 में महत्व
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 ने Forensic Science के महत्व को आपराधिक न्याय व्यवस्था के केंद्र में ला दिया है | क्योंकि नए आपराधिक प्रक्रिया कानून में जांच के केंद्रबिंदु में Forensic Science को अधिक महत्व दिया गया है |
BNSS 2023 के तहत गंभीर अपराधों, जिनमे सजा 7 वर्ष या उससे अधिक का प्रावधान किया गया है ,में फॉरेंसिक टीम द्वारा जांच को आज्ञापक बनाया गया है |
इसमें पुलिस को सिर्फ गवाहों पर निर्भर नहीं रहना पडेगा, बल्कि Forensic Science आधारित आधुनिक तकनीकों के उपयोग करते हुए जांच करनी होंगी | इससे न्याय प्रक्रिया की सुचिता पर आम लोगों का भरोसा बढ़ेगा |
इसके अलावा, BNSS में डिजिटल तकनीकों और electronic evidence को भी अधिक मान्यता दी गई है | जिससे साइबर क्राइम और अन्य अपराधों की जांच सटीकता और तेजी से हो सकेगी |
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भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 में महत्व
भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 में Forensic Science सम्बंधित नए प्रावधानों से इसका महत्व अत्यधिक बढ़ गया है | नए साक्ष्य क़ानून में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को व्यापक मान्यता दी है |
नए क़ानून के तहत Forensic Science तकनीकी से जुटाए गए तथा विश्लेषित किये गए सबूतों को साक्ष्य के रूप में स्वीकारे जाने को आसान बनाया गया है | जिससे अदालतें विवादित तथ्यों का निर्णय अधिक वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर कर सकें |
विशेष रूप से, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जैसे मोबाइल डेटा, CCTV फुटेज, ई-मेल और डिजिटल रिकॉर्ड्स को भी स्पष्ट रूप से साक्ष्य के रूप में शामिल किया गया है, जिससे आधुनिक डिजिटल अपराधों की जांच और उनका न्यायालय में निराकरण आसान हो गया है |
सही कहा जाए तो BSA 2023 ने Forensic Science को न्यायिक प्रक्रिया का एक मजबूत स्तंभ बना दिया है | जिससे, जहाँ सच्चाई अब गवाहों से अधिक वैज्ञानिक साक्ष्यों के माध्यम से सामने आ रही है। जिससे न केवल दोषियों को सजा दिलाना आसान होता है, बल्कि निर्दोष व्यक्तियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है।
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अदालतों द्वारा Forensic Science साक्ष्य की मान्यता
नए कानूनी प्रावधानों के तहत अदालतें Forensic Science साक्ष्य को अत्यंत महत्वपूर्ण और विश्वसनीय मानती हैं, लेकिन उन साक्ष्यों की स्वीकार्यता इस बात पर निर्भर करती है कि वह वैज्ञानिक, विधिक कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए एकत्रित, विश्लेषित एवं न्यायालय प्रस्तुत किये गए हों |
माननीय सुप्रीम कोर्ट की विधि व्यवस्था Haji Mohammad Ekramul Haq vs The State of West Bengaal , AIR 1959 SC 488 में स्थापित किया गया है कि , “An opinion of expert unsupported by any reason is not to be relied on.”
माननीय सुप्रीम कोर्ट की विधि व्यवस्था Himaachal Pradesh vs Jai Lal and others ,AIR 1999 SC 3318 में स्थापित किया गया है कि , “An expert witness, is one who has made the subject upon which he speaks a matter of particular study, practice ; or observations ; and the must have a special knowledge of the subject.”
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निष्कर्ष — क्या अब अपराधियों का बचना मुश्किल?
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा Forensic Science को बढ़ावा दिया जाना उत्तर प्रदेश में आपराधिक जांच को नई दिशा दे रहा है | जहा सिर्फ गवाही या ब्यान नहीं बल्कि वैज्ञानिक साक्ष्य सत्य का निर्धारण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे |
Forensic Science की आधुनिक तकनीकों जैसे कि DNA परीक्षण, डिजिटल फॉरेंसिक, CCTV विश्लेषण और आधुनिक प्रयोगशालाओं के व्यापक विस्तार ने आपराधिक जांच नतीजों को अधिक सटीक, पारदर्शी तथा विश्वसनीय बना दिया है |
इससे न सिर्फ आरोपियों के बच निकलने की सम्भावनाये कम हो गई हैं, बल्कि निर्दोष लोगों के झूठे मुकदद्मों से बचने की उम्मीद भी प्रबल हुई हैं |
यद्धपि इस परिवर्तन को अधिक प्रभावी बनाये जाने के लिए आवश्यक है कि कस्टडी ऑफ़ चैन, जिसमें अपराध स्थल से साक्ष्य संकलन से लेकर उनके विश्लेषण और न्यायालय में प्रस्तुत करने की प्रक्रिया शामिल है, को विशेष प्रशिक्षण द्वारा मजबूत बनाया जाए | साथ ही Forensic Science की जांच प्रक्रिया में देरी को रोकने के लिए भी प्रभावी उपायों की आवश्यकता है |
आखिर में यह कहा जा सकता है कि Forensic Science सिर्फ एक तकनीकी नहीं है बल्कि वह पीड़ित तथा झूठे फसाये गए व्यक्तियों को न्याय दिलाने का सशक्त माध्यम है |
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा Forensic Science को बढ़ावा दिए जाने की दिशा में निरंतर उठाये जा रहे कदम उत्तर प्रदेश में न्याय की दिशा में क्रांतिकारी बदलाव ला रहे हैं |
जो उत्तर प्रदेश में आपराधिक न्याय व्यवस्था को अधिक निष्पक्ष, आधुनिक और प्रभावी बनाने की क्षमता रखते हैं | जहाँ अपराधियों का बचना अब होगा दिन -पर दिन मुश्किल |
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ ):
प्रश्न 1 . Forensic Science क्या है और यह जांच में कैसे मदद करती है?
उत्तर :Forensic Science आपराधिक घटनाओं की जांच की एक वैज्ञानिक पद्धति है, जिसके माध्यम से DNA, फिंगरप्रिंट, डिजिटल डेटा जैसे साक्ष्यों का विश्लेषण कर अपराध की सच्चाई पता लगाई जाती है। यह जांच को सटीक और निष्पक्ष बनाकर जांच में मदद करती है |
प्रश्न 2 .उत्तर प्रदेश में कितनी Forensic Labs हैं ?
उत्तर :आज प्रदेश में 12 Forensic Labs कार्यरत हैं तथा 6 नए Forensic Labs बनाये जा रहे हैं |
प्रश्न 3. उत्तर प्रदेश में Forensic Science का महत्व क्यों बढ़ रहा है?
उत्तर :उत्तर प्रदेश की अधिक आबादी के चलते बढ़ते अपराध तथा गवाहों के मुकरने के कारण मुकदद्मों में अपराधी छूट जाते हैं जिससे अपराधियों के हौसले बढ़ जाते हैं और दुबारा अपराधों में संलिप्त हो जाते हैं |
जिसके कारण Forensic Science का महत्व उत्तर प्रदेश में बढ़ रहा है | क्यों कि वैज्ञानिक जांच अधिक विश्वसनीय होने के कारण अपराधियों का सजा से बचपाना आसान नहीं होता है |
प्रश्न 4 . क्या Forensic Evidence अदालत में मान्य होता है?
उत्तर : हाँ, यदि साक्ष्य की चेन ऑफ़ कस्टडी में कोई खामी नहीं छोड़ी हो अर्थात साक्ष्य संकलन सही प्रक्रिया से एकत्र और सुरक्षित रखा गया हो, तो अदालत में इसे मजबूत प्रमाण माना जाता है।
प्रश्न 5 . Forensic Science की उन्नति में Uttar Pradesh State Institute of Forensic Science की क्या भूमिका है?
उत्तर :Uttar Pradesh State Institute of Forensic Science(UPSIFS) राज्य में फॉरेंसिक शिक्षा, रिसर्च और प्रशिक्षण प्रदान करता है, जिससे छात्रों , पुलिस और जांच एजेंसियों की क्षमता बढ़ती है।
प्रश्न 6 .क्या उत्तर प्रदेश के हर जिले में फॉरेंसिक सुविधा उपलब्ध होगी?
उत्तर : हाँ , उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी जी के दिशानिर्देश के अनुसार Forensic Experts को प्रशिक्षित कर हर जिले तक Forensic Science को पहुंचाने की दिशा में निरंतर काम किया जा रहा है।
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अस्वीकरण :
यह लेख केवल शैक्षणिक और विधिक जन-जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है | यह किसी विशेष व्यक्ति, संस्था या मामले के लिए कानूनी सलाह नहीं है | अधिक जानकारी के लिये योग्य अधिवक्ता से परामर्श आवश्यक है |
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Note: Image credit: AI-generated illustration (created with ChatGPT)
लेखक
Dr Raj Kumar
Founder- Human Rights Guru / Law Vs Reality