
अभी हाल ही मे Stray Dogs के प्रबंधन के सम्बन्ध में अपने स्वतः संज्ञान मामले में न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारी की तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है |
पीठ ने अपने फैसले में भारतीय पशु कल्याण बोर्ड द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया को बरकरार रखा है तथा राज्यों,केंद्रशासित प्रदेशों तथा नागरिक प्राधिकरणों को पशु जन्म नियंत्रण नियमों के बेहतर क्रियान्वयन के सम्बन्ध में नए दिशा निर्देशों को जारी किया गया है |
सर्वोच्च न्यायालय ने 7 नवंबर 2025 को दिए गए दिशा निर्देश तथा भारतीय पशु कल्याण बोर्ड द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है |
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Supreme Court के हालिया फैसले में क्या कहा गया?
हालिया निर्णय में माननीय सुप्रीम कोर्ट ने Stray Dogs के प्रभावी प्रबंधन के लिए दिए गए प्रमुख निर्देश निम्नवत हैं
1. हर जिले में बनेगे ABC सेंटर
माननीय अदालत ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को हर जिले में कम से कम एक ABC (Animal Birth Control) सेंटर बनाने का निर्देश दिया गया। जो पूरी तरह कार्यरत होना चाहिए |
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2. ज्यादा आबादी वाले क्षेत्रों में अधिक सेंटर
अदालत ने यह भी कहा है कि जहां जनसंख्या अधिक होने की स्थति में आनुपातिक रूप में जरूरत के अनुसार ABC सेंटरों की संख्या बढ़ाई जा सकती है |
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3. नियमों को पूरी तरह लागू करना आज्ञापक बनाया
माननीय अदालत ने कहा है कि उनके आदेश तथा AWBI Rules बिना देरी के सही और प्रभावी तरीके से लागू करने होंगे।
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4. भीड़भाड़ वाले स्थानों पर विशेष ध्यान
माननीय अदालत ने यह भी कहा है कि भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों जैसे की बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, बाजार अदि पर सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम करने होंगे |
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5. टीकाकरण और चिकित्सा सुविधाएं बढ़ानी होंगी
अदालत ने सभी राज्यों तथा केंद्र शाषित प्रदेशों को रेबीज टीकाकरण और पशु चिकित्सा सुविधाएं बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं |
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6. अस्पतालों में Anti-Rabies Vaccine की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी
अदालत के अनुसार Stray Dogs हमले के पीड़ितों के लिए सरकारी अस्पतालों में Anti-Rabies Vaccine और अन्य आवश्यक दवाइयों की पर्याप्त व्यवस्था करनी होगी।
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7. हाईवे और एक्सप्रेसवे पर विशेष व्यवस्था
अदालत ने सड़कों पर आवारा पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटनाओं का भी संज्ञान लेते हुए National Highways Authority of India (NHAI) को हाईवे और एक्सप्रेसवे पर आवारा पशुओं से निपटने के लिए विशेष व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं |
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8. खतरनाक और रेबीज ग्रसित कुत्तों पर कानूनी कार्रवाई
अदालत ने खतरनाक, रेबीज ग्रसित या गंभीर रूप से बीमार कुत्तों पर कठोरता से क़ानून के अनुरूप कार्रवाई किये जाने की सिफारिश की है |
माननीय अदालत ने सार्वजनिक सुरक्षा को महत्व देते हुए स्पष्ट कहा है कि,
” जिन क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की आबादी खतरनाक स्तर तक बढ़ गई है और जहां कुत्तों के काटने या आक्रामक हमलों की घटनाएं अक्सर होने लगी हैं और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए लगातार खतरा बनी हुई हैं,
वहां संबंधित अधिकारी, योग्य पशु चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा उचित मूल्यांकन के अधीन और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960, पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023 और अन्य लागू वैधानिक प्रवर्तनों के प्रावधानों के अनुसार, कानूनी रूप से अनुमत उपाय कर सकते हैं,
जिनमें रेबीज से ग्रसित, असाध्य रूप से बीमार या स्पष्ट रूप से खतरनाक/आक्रामक कुत्तों के मामलों में इच्छामृत्यु शामिल है, ताकि मानव जीवन और सुरक्षा के लिए उत्पन्न खतरे को प्रभावी ढंग से रोका जा सके।”
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9. Stray Dogs प्रबंधन में लगे अधिकारियों को कानूनी सुरक्षा
माननीय अदालत ने Stray Dogs प्रबंधन में लगे अधिकारियों को कानूनी सुरक्षा प्रदान किये जाने के आदेश दिए हैं, यदि अधिकारी ईमानदारी से अदालत के आदेश लागू करते हैं, तो सामान्य स्थिति में उनके खिलाफ FIR या आपराधिक कार्रवाई नहीं होगी।
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10. Stray Dogs प्रबंधन के लिए High Courts निगरानी के आदेश
देश के सभी उच्च न्यायालयों को अपने-अपने राज्यों में इन निर्देशों के पालन की निगरानी करने का निर्देश दिया गया।
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11. आदेश न मानने पर अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई का प्रावधान
Stray Dogs प्रबंधन में लगे जो अधिकारी अदालत के आदेशों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ अवमानना (Contempt of Court) की कार्रवाई हो सकती है।
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भारत में Stray Dogs को लेकर वर्तमान कानून क्या है?
भारत में Stray Dogs से संबंधित कानून मुख्य रूप से पशु के संरक्षण और सार्वजनिक सुरक्षा से सम्बंधित हैं। भारत में वर्तमान में निम्न कानून और नियम प्रमुख रूप से लागू हैं—
Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960
भारत में इस क़ानून (Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960) का निर्माण पशुओं को संरक्षण प्रदान करने के लिए किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य पशुओं के प्रति क्रूरता रोकना है। इसके तहत Stray Dogs को मारना तथा पीटना भी अपराध हैं तथा पशुओं के प्रति किसी तरह का अमानवीय व्यवहार प्रतिबंधित है तथा अपराध की श्रेणी में आता है |
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Animal Birth Control (ABC) Rules
ये नियम Animal Birth Control (ABC) Rules,2023 विशेष रूप से आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए बनाए गए हैं।जिसके अनुसार Stray Dogs की नसबंदी (Sterilization) की जाती है। Stray Dogs को Anti-Rabies Vaccination दिया जाता है |
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Stray Dogs के सम्बन्ध में नगर निगमों की जिम्मेदारी
कानूनन नगर निगम और स्थानीय निकायों पर यह उत्तरदायित्व होता है कि वह Stray Dogs हमलो से आम आदमी को बचाये तथा सार्वजनिक सुरक्षा को सुनिश्चित करें | Stray Dogs को नियंत्रित करें तथा इनके प्रबंधन के लिए आवश्यक तथा उचित प्रयास करें |
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मानव अधिकार बनाम पशु अधिकार
भारत में Stray Dogs को लेकर शुरू हुई बहस अब मात्र पशु संरक्षण तक सीमित न रहकर सार्वजानिक सुरक्षा तक पहुंच गई है | एक सरकारी आकड़े के अनुसार भारत में Stray Dogs के हमलों की संख्या लगातार बढ़ रही है |
ऐसी स्थति में यह मुद्दा केवल पशु संरक्षण का नहीं रह जाता है, बल्कि Stray Dogs के हमलों से पीड़ित लोगों के मानव अधिकार का भी बन जाता है |
यह सही है कि पशुओं के भी अधिकार होते हैं, लेकिन उनके अधिकारों की कीमत पर Stray Dogs के हमलों से पीड़ित लोगों के मानव अधिकार का उलंघन नहीं बर्दास्त नहीं किया जा सकता है | हालिया निर्णय में भी अदालत ने सार्वजनिक सुरक्षा को ऊचे पायदान पर माना है |
एक ओर पशु अधिकार संगठनों का मानना है कि आवारा कुत्तों के साथ किसी भी तरह की क्रूरता नहीं होनी चाहिए, वहीं दूसरी ओर Stray Dogs के हमलों से पीड़ित न्यायालयों में पहुंच कर गुहार लगा रहे हैं कि बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों की सुरक्षा प्राथमिकता पर सुनिश्चित की जानी चाहिए।
अदालत ने मानव अधिकारों का सम्मान करते हुए सार्वजानिक सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए Stray Dogs के कल्याण के लिए भी दिशा निर्देश जारी लिए गए हैं |
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मानव अधिकारों का संवैधानिक पक्ष
भारतीय संविधान के Article 21 के अंतर्गत प्रत्येक व्यक्ति को जीवन और व्यक्तिगत सुरक्षा का अधिकार प्राप्त है।भारत में लगातार Stray Dogs के हमलों की बढ़ती घटनाओं ने न सिर्फ समाज को बल्कि न्यायपालिका को भी प्रभावित किया | जिसके परिणाम स्वरुप माननीय सुप्रीम कोर्ट ने मामले का स्वयं संज्ञान लिया |
इस मुद्दे में Stray Dogs के बच्चों पर हमले, वुजूर्गों पर हमले के साथ -साथ रेबीज संक्रमण का खतरा और सार्वजनिक स्थानों पर भय व्याप्त हो गया | जिसके कारण इस मुद्दे को मानव अधिकार से जोड़कर देखा जाने लगा |
भारत में Stray Dogs के लगातार बढ़ रहे हमलों तथा संवैधानिक पहलुओं पर विचार करते हुए, न्यायालय ने निर्णय के पेराग्राफ 99 में कहा है कि ,
“भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार प्रत्येक नागरिक के स्वतंत्र रूप से घूमने और सार्वजनिक स्थानों तक पहुँचने के अधिकार को समाहित करता है, बिना किसी निरंतर शारीरिक क्षति, हमले या जानलेवा घटनाओं जैसे सार्वजनिक स्थानों पर कुत्ते के काटने के डर के।
राज्य ऐसे हालात में मूकदर्शक नहीं रह सकता जहाँ रोके जा सकने वाले, मानव जीवन के लिए खतरे लगातार बढ़ रहे हैं, जबकि उनसे निपटने के लिए विशेष रूप से बनाए गए वैधानिक तंत्र मौजूद हैं।”
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Supreme Court के फैसले के बाद क्या बदल सकता है?
1. नगर निकायों की जवाबदेही बढ़ सकती है
माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद Stray Dogs प्रबंधन के लिए उत्तरदाई संस्थाओं, जैसे नगर निकाय ,ग्राम पंचायत आदि पर अब अधिक दबाव रहेगा कि वह Stray Dogs Attack की घटनाओं को नियंत्रित करे तथा साथ ही Stray Dogs प्रबंधन के लिए क़ानून तथा माननीय सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों का समुचित पालन करें।
2. Stray Dogs का नसबंदी अभियान तेज हो सकते हैं
सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के गंभीरता से पालन तथा राज्यों के हाई कोर्ट की निगरानी में Animal Birth Control कार्यक्रमों को अधिक व्यवस्थित तरीके से लागू किया जा सकता है। जिसमे Stray Dogs का नसबंदी अभियान भी शामिल है, तेज हो सकते हैं|
3. Stray Dogs से सार्वजनिक सुरक्षा को प्राथमिकता
सुप्रीम कोर्ट के हालिया दिशा निर्देश के अनुपालन में निश्चित रूप से यह संभावनाएं प्रबल हैं कि राज्य सरकारें संवेदनशील क्षेत्रों—जैसे स्कूल, अस्पताल और पार्क—के आसपास विशेष सार्वजनिक सुरक्षा उपाय लागू करेंगे।
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निष्कर्ष
भारत में Stray Dogs का मुद्दा अत्यधिक संवेदनशील है कि एक ओर पशु प्रेमियों की बड़ी संख्या है तथा दूसरी ओर Stray Dogs के हमलों के पीड़ित लाखों लोग हैं |
विगत कुछ वर्षों से Stray Dogs का आतंक बहुत बढ़ गया था जिसके बाद एक मामले का सुप्रीम कोर्ट को स्वतः संज्ञान पड़ा | जिसकी सुनवाई के परिणाम स्वरुप आए निर्णय से स्पष्ट हुया है कि Stray Dogs के हमलों की समस्या एक गंभीर सार्वजनिक सुरक्षा और मानव अधिकार का विषय बन चुका है |
अदालत ने निर्णय दिया कि क़ानून को सार्वजनिक सुरक्षा तथा पशु संरक्षण में संतुलन स्थापित करना होगा | अदालत ने मानवीय जीवन के संरक्षण के अधिकार को पशु संरक्षण के अधिकार से उच्च पायदान पर रखा है |
अदालत ने सरकार को उपलब्ध कानूनों का समुचित अनुपालन करने के भी दिशा निर्देश दिए गए हैं तथा उसकी निगरानी की भी पुख्ता व्यवस्था के भी आदेश दिए हैं |
अर्थात Stray Dogs की समस्या के स्थाई समाधान के लिए प्रशासन, न्यायपालिका और समाज को मिलकर व्यावहारिक कार्य करना होगा सिर्फ क़ानून की उपलब्धता और दिशा निर्देशों से काम नहीं चल सकता है |
सभी को मिलकर प्रशासन, न्यायिक और सामाजिक इच्छा शक्ति का वास्तविकता में प्रदर्शन करना होगा तभी इस जटित समस्या से हमें निजात मिलना संभव हो सकेगा |
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1 : आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट का नया आदेश क्या है?
उत्तर : सुप्रीम कोर्ट ने नसबंदी करने के बाद Stray Dogs को उसी स्थान पर पुन्हें न छोड़े जाने के अपने पुराने दिशानिर्देश सम्बंधित आदेश को बदलने से स्पष्ट इंकार कर दिया है |
प्रश्न 2. Supreme Court का फैसला Stray Dogs को लेकर क्या कहता है?
उत्तर : Supreme Court of India के हालिया निर्णय में मानव सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य को महत्वपूर्ण मानते हुए राज्यों एवं नगर निकायों से Stray Dogs की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए कहा है |
प्रश्न 3. क्या भारत में Stray Dogs को उनके स्थान से हटाना कानूनी रूप से प्रतिबंधित है?
उत्तर :भारत में Dogs को मनमाने तरीके से हटाना या उन्हें नुकसान पहुँचाना कानूनन प्रतिबंधित है। हालांकि, Animal Birth Control Rules के तहत नसबंदी और पुनर्वास के प्रावधान किये गए है |
प्रश्न 4. Dog Bite होने पर कानूनी जिम्मेदारी किसकी होती है?
उत्तर :Dog Bite होने पर कानूनी जिम्मेदारी स्थानीय नगर निगम, नगर पालिका या संबंधित प्रशासनिक निकाय जैसे ग्राम पंचायत पर होती है।
प्रश्न 5. क्या Stray Dogs को खाना खिलाना गैरकानूनी है?
उत्तर :सामान्य रूप से खाना हर जगह नहीं खिलाया जा सकता है इसके लिए बनाये गए निर्धारित स्थानों पर ही खाना खिलाना चाहिए | जिससे सार्वजनिक सुरक्षा और स्वच्छता प्रभावित न हो।
प्रश्न 6. Animal Birth Control (ABC) Rules क्या हैं?
उत्तर :भारत में Dogs की नसबंदी और Anti-Rabies Vaccination कर उनकी संख्या नियंत्रित करने के उद्देश्य से Animal Birth Control (ABC) Rules बनाये गए हैं |
प्रश्न 7. Supreme Court ने मानव सुरक्षा पर क्या टिप्पणी की?
उत्तर :Supreme Court of India ने जीवन का अधिकार के तहत नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता का विषय बताया है जिसे प्रशासन द्वारा गंभीरता से लिया जाना चाहिए |
प्रश्न 8. भारत में Stray Dogs की समस्या क्यों बढ़ रही है?
उत्तर : भारत में खराब प्रबंधन और क़ानून की अवहेलना इसके लिए जिम्मेदार माना गया है |
प्रश्न 9. Stray Dogs Attack की स्थिति में शिकायत कहाँ करें?
उत्तर :Stray Dogs Attack की स्थिति में शिकायत स्थानीय नगर निगम, पुलिस प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग में दर्ज कराई जा सकती है।
प्रश्न 10. क्या भारत में Stray Dogs को मारना कानूनी अपराध है?
उत्तर :हाँ, Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960 क़ानून के तहत यह कार्य अपराध है |
प्रश्न 11. क्या Stray Dogs के हमले में घायल होने या मृत्यु होने पर मुआवजा मिल सकता है ?
उत्तर : हाँ ,न्यायालय के माध्यम से यह मुआवजा मिल सकता है | अधिक जानने के लिए पढ़े यह लेख ,”पशु हमले में मृत्यु पर मुआवजा : भारत में क्या है अधिकार ?“
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Note: Image credit: AI-generated illustration (created with ChatGPT)
लेखक
Dr Raj Kumar
Founder- Human Rights Guru / Law Vs Reality