रु 54,000 करोड़ का Digital Fraud: Supreme Court ने क्यों कहा “लूट या डैकेती”?

भूमिका :Digital Fraud -एक नया संगठित अपराध

भारत में डिजिटिल क्रांति के साथ -साथ डिजिटल ट्रांजेक्शन्स, ऑनलाइन बैंकिंग के विस्तार के साथ -साथ Digital Arrest जैसे नए प्रकृति के गंभीर और संगठित साइबर अपराध तेजी से उभर कर सामने आएं हैं |

Digital Fraud का सम्बन्ध केवल तकनीकी या व्यक्तिगत अपराध तक नहीं रहा है, बल्कि अब यह अपराध बैंकिंग व्यवस्था, आमआदमी और न्याय व्यवस्था पर सीधे हमले में बदल गया है |

आम आदमी क्या, खास और उच्च शिक्षित लोग भी इस अपराध से बच नहीं पा रही हैं | इस अपराध के संबंध में एक बुजुर्ग दम्पति की शिकायत पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए शिकायत को एक जनहित याचिका के रूप में परिवर्तित कर दिया |

इस सन्दर्भ में सुनवाई के समय अदालत ने रु 54000 करोड़ से अधिक की अनुमानित Digital Fraud को “लूट या डकैती ” करार दिया | अदालत ने यहां तक कहा की यह एक छोटे -मोठे राज्य के बजट से ज्यादा है |

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हरियाणा वरिष्ठ नागरिक दम्पति Digital Fraud मामला कैसे आया सुर्खियों में ?

इस प्रकरण की शुरूआत हरियाणा के एक वरिष्ठ नागरिक दम्पति की शिकायत से हुई | दंम्पति ने आरोप लगाया कि Digital Arrest करके ठगी करने वालों ने स्वयं को पुलिस अधिकारी बताया तथा सुप्रीम कोर्ट का फर्जी आदेश दिखाकर धमकी दी |

Digital अरेस्ट के चलते वरिष्ठ नागरिक दम्पति ने अपने जीवन भर की बचत ठगों द्वारा बताये गए बैंक खातों में स्थानांतरित कर दी | यह पूजी 1.5 करोड़ रूपये थी |

आगे चलकर यही हरियाणा के वरिष्ठ नागरिक दम्पति Digital Fraud/Digital Arrest का मामला राष्ट्रीय स्तर पर अख़बारों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की सुर्खियां बना |

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NRI दंम्पति की 16 दिन की Digital Arrest 2026 और ₹14.84 करोड़ की ठगी !

साउथ दिल्ली के पाश इलाके के रहने वाले बुजुर्ग NRI दंम्पति डॉ. ओम तनेजा और डॉ. इंदिरा तनेजा को साइबर ठगों द्वारा Digital Arrest कर लिया गया | यह दंम्पति 16 दिनों तक अपने ही घर में Digital Arrest रहा |

24 दिसंबर 2025 से 9 जनवरी 2026 तक, इस कपल को लगातार वीडियो कॉल के ज़रिए निगरानी में रखा गया। इस दौरान इस दंपत्ति से साइबर ठगों ने करीब 14 करोड़ रूपये की भारी-भरकम रकम अपने खातों में ट्रांसफर करा ली | भारत का Digital Arrest के माध्य्म से शायद यह सबसे बड़ी रकम साइबर अपराधियों द्वारा Digital Fraud का मामला हो |

ठगी करने वालों ने स्वयं को मुंबई साइबर क्राइम सेल से जुड़ा पुलिस अधिकारी बताया और फ़ोन पर दंम्पति से बात करते हुए कहा कि आपके फ़ोन से जुडी 26 कम्प्लेंट आई हैं और उससे अश्लील पिक्चर्स भेजी गई हैं | आप मनीलॉन्डरिंग में भी इन्वॉल्व हैं |

आपके विरुद्ध FIR भी है | दम्पति ने कहा ये कैसे हो सकता है ? लेकिन साइबर ठगों द्वारा बुजुर्ग दम्पति को Digital Arrest के जरिये ठगे जाने (Digital Fraud) पर सम्पूर्ण भारत के लोग सन्न रह गए |

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बुजुर्ग दम्पति की शिकायत कैसे बनी सुप्रीम कोर्ट में Digital Fraud जनहित याचिका (PIL)?


बुजुर्ग दंपत्ति की सुप्रीम कोर्ट में शिकायत के बाद यह मामला किसी प्रथम सूचना रिपोर्ट का मोहताज नहीं रहा | सुप्रीम कोर्ट ने Digital Fraud की इस शिकायत को महत्वपूर्ण मानते हुए इसे एक व्यवस्थित और व्यापक जनहित का मुद्दा स्वीकार किया |

अदालत ने पाया कि Digital Arrest के रूप में Digital Fraud का मामला सम्पूर्ण देश में फ़ैल चुका है | Digital Fraud के निशाने पर अधिकाँश वरिष्ठ नागरिक और विशेष रूप से कमजोर वर्ग के लोग आ रहे हैं |

इन अपराधों की चपेट में न सिर्फ अनपढ़ लोग ही आ रहे हैं, बल्कि उच्च शिक्षित और हर उम्र के लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं | इन अपराधों में लगातार बृद्धि भी देखी जा रही है |

Digital Fraud Scam — सुप्रीम कोर्ट का Suo Motu Case

यह अपराध संगठित अपराध के अलावा अंतराज्यीय और अंतर्राष्ट्रीय रूप धारण कर चुका है | इसी आधार पर यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में Digital Fraud जनहित याचिका के रूप में तब्दील हुया |

पिछले वर्ष अक्टूबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट घोटाले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए उसे :IN RE: VICTIMS OF DIGITAL ARREST RELATED TO FORGED DOCUMENTS नामक शीर्षक के साथ जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया गया | इस याचिका का SUO MOTO WRIT PETITION (CRIMINAL) No(s). 3/2025 है |

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निष्कर्ष:

भारत मे बरिष्ठ नागरिक दंम्पति की 1.5 करोड़ रूपये की Digital Fraud सम्बंधित शिकायत एक राष्ट्रीय चेतावना बन चुकी है | इस शिकायत को सुप्रीम कोर्ट द्वारा Digital Fraud PIL के रूप में स्वीकार कर चुका है |

जिस पर सुनवाई जारी है और न्यायालय ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है | यही नहीं पूर्व में भी हाई कोर्ट्स इस मुद्दे पर बेल के सम्बन्ध में कठोर रूक अपनाने के लिए कह चुके हैं |

सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्णियों से स्पष्ट संकेत मिलता है कि Digital Fraud जिसमे Digital Arrest भी शामिल है,अब केवल सामान्य साइबर अपराध नहीं रहा है बल्कि एक राष्टीय सुरक्षा और संवैधानिक विश्वास का गंभीर प्रश्न बन चुका है |

Digital Arrest द्वारा साइबर अपराधी जब किसी व्यक्ति की जीवन भर की कमाई एक झटके में लूट लेते है तो व्यक्ति आज की दुनिया में हर तरह से अपँग हो जाता है यहाँ तक कि रोटी, कपड़ा, इलाज, बच्चों की पढाई, परिवाहन सुविधा आदि सभी जीवन के लिए आवश्यक मूल -भूत सुविधाओं से वंचित हो जाता है | यह स्थति उसके सभी प्रकार के मानव अधिकारों का अतिक्रमण करती है|

अब समय आ गया है कि भारत में Digital Fraud से आम और ख़ास सभी नागरिकों को बचाने के लिए सभी संभव उपाय सरकार, न्यायपालिका और नागरिक स्तर पर किया जाना आवश्य्क है | इसके लिए प्रबल राजनीतिक इच्छाशक्ति की महती आवश्यकता है |

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ )

प्रश्न 1: रु 54,000 करोड़ का Digital Fraud किसने किया?


उत्तर : सुप्रीम कोर्ट के अनुसार Digital Fraud करने वाले संगठित साइबर अपराधी हैं |जिनके द्वारा डिजिटल अरेस्ट के माध्यम से आमजन तथा वरिष्ठ नागरिकों से बड़ी धनराशि ठग ली गई है | सुप्रीम कोर्ट ने इसे लूट या डकैती कहा है |

प्रश्न 2: Digital Arrest क्या है?


उत्तर : Digital Arrest कई प्रकार से डर दिखा कर डिजिटल तरीके से पैसे लूटने या ठगने का नया तरीका है | इसमें डिजिटल फ्रॉड करने वाले साइबर अपराधी फोन के माध्यम से व्यक्ति से संपर्क करते हैं तथा उसकी किसी गंभीर अपराध में संलिप्ता दिखाकर पुलिस या किसी जांच संस्था का भय पैदा करके अपने बताये गए खातों में पैसे ट्रांसफर करवा लेते हैं |


प्रश्न 3: सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में क्या कदम उठाए?


उत्तर : एक वरिष्ठ नागरिक की डिजिटल फ्रॉड सम्बंधित शिकायत को सुप्रीम कोर्ट ने जनहित याचिका (PIL) के रूप में स्वीकार किया और मामले का गंभीरता से संज्ञान लिया। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि यह रकम कई छोटे राज्यों के बजट से अधिक है।


प्रश्न 4: आम नागरिक इस प्रकार के Digital Fraud से कैसे बच सकते हैं?


उत्तर : ऑनलाइन बैंकिंग और लेन-देन करने वाले लोगों को सतर्क रहना चाहिए तथा अज्ञात मोबाइल कॉल या ईमेल पर कभी भी निजी जानकारी साझा करनी चाहिए | Digital Fraud के सम्बन्ध में सरकार और पुलिस द्वारा जारी दिशानिर्देशों का पालन करें तथा ठगी होते ही सरकार द्वारा जारी किये गए नंबर पर सूचना दे तथा ऑनलाइन शिकायत करें |


प्रश्न 5 : Digital Fraud का व्यापक प्रभाव क्या है?


उत्तर : Digital Fraud केवल व्यक्तिगत ठगी का मामला नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का भी मामला है | यह गरीब और वरिष्ठ नागरिकों को ज्यादा प्रभावित कर रहा है |

अस्वीकरण :

यह लेख केवल शैक्षणिक और जन-जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है | यह किसी विशेष व्यक्ति, संस्था या मामले के लिए कानूनी सलाह नहीं है | अधिक जानकारी के लिये योग्य अधिवक्ता से परामर्श आवश्यक है |

Note: Image credit: AI-generated illustration (created with ChatGPT)

 लेखक

Dr Raj Kumar
Founder, HumanRightsGuru / LawVsReality

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