Failed Romantic Relationship: क्या संबंध टूटने पर बनता है बलात्कार का केस? BNS 2023

1.प्रस्तावना

नया कानून BNS 2023 के आने के बाद Failed romantic relationship के मामलों में भारतीय अदालतों ने कई महत्वपूर्ण निर्णय दिए हैं |

इनमें स्पष्ट किया गया है कि यदि दो वयस्कों के बीच आपसी सहमति से बने सम्बन्ध असफल हो जाते हैं, तो केवल सम्बन्ध टूटने के आधार पर बलात्कार जैसे गंभीर आरोप स्वतः सिद्ध नहीं होते हैं |

अदालतों को यह देखना होता है कि क्या प्रारम्भ से ही विवाह का झूठा वादा करके सहमति प्राप्त की गई थी या आपसी सम्बन्ध वास्तव में सहमति पर आधारित थे | नया क़ानून लागू होने के बाद इस प्रकार के मुकदद्मे बहुतायत में देखे जा रहे हैं |

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2. Failed Romantic Relationship क्या होता है?

Failed Romantic Relationship का तात्पर्य ऐसे प्रेम संबंधों से है जो किसी समय आपसी सहमति, भावनात्मक लगाव और विवाह होने की संभावना के कारण शरू होते हैं, लेकिन बाद में विभिन्न कारणों से असफल या समाप्त हो जाते हैं |

सरल शब्दों में कहा जाए तो दो व्यक्तियों के बीच बने Romantic Relationship किसी कारणवश समाप्त हो जाते हैं तो उसे Failed Romantic Relationship कहते हैं |

इन संबंधों के असफल होने के कई कारण सामने आये हैं, जैसे कि पारस्परिक मतभेद, परिवारीजनों का विरोध, अंतर्जातीय या अंतर धार्मिक बाधाएं, जीवन के लक्ष्य अलग हो जाना, परिस्थितयों में बदलाव आदि |

कानूनन Failed Romantic Relationship का महत्व तब बढ़ जाता है, जब सम्बन्ध समाप्त या असफल होने के बाद एक पक्षकार द्वारा धोखे, झूठे विवाह का वादा या कोई और गंभीर आरोप लगाया जाता है |

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3. सहमति (Consent) का कानूनी महत्व

भारतीय आपराधिक कानून में सहमति का का अत्यधिक महत्व है, विशेष कर उन अपराधों में जो शारीरिक संबंधों या अन्य अपराधों से जुड़े होते हैं |

कानूनन यह प्रावधान है कि किसी वयस्क व्यक्ति द्वारा स्वेच्छा और स्वतंत्र इच्छा से दी गई सहमति कई परिस्थितयों में कानूनी रूप से मान्य होती है |

सहमति का मूल सिद्धांत है कि किसी वयस्क व्यक्ति द्वारा स्वेच्छा से किसी अन्य व्यक्ति को कोई कार्य करने की अनुमति बिना किसी दबाब, डर, धोखाधड़ी या जबरदस्ती के प्रदान की है, तब वह कार्य सामान्यतः अपराध की श्रेणी में आता है |

किसी व्यक्ति द्वारा अन्य व्यक्ति से धोखे से, जानकारी छुपा कर, डर ,धमकी या दबाब, व्यक्ति की अल्पवयस्क अवस्था में, व्यक्ति मानसिक रूप से स्वंत्रत रूप से निर्णय लेने की स्थति में न होने पर, ली गई सहमति कानूनी रूप से वास्तविक सहमति के दायरे में नहीं आती है |

ऐसी सहमति का कानूनी रूप से मूल्य शून्य माना जाता है | किसी भी मामले में सहमति की प्रकृति और परिस्थितयां बहुत मायने रखती हैं |

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4. असफल प्रेम संबंध और बलात्कार का आरोप

भारत में अनेक मामले सामने आ रहे हैं जिनमें प्रेम सम्बन्ध (Romantic Relationship) आगे चलकर टूट जाते हैं या असफल हो जाते हैं और उसके बाद बलात्कार का आरोप लगा दिया जाता है |

प्रश्न उठता है कि ऐसी स्थितियों में बलात्कार का आरोप सही माना जा सकता है ? इस सम्बन्ध में समय -समय पर विभिन्न अदालतों ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक मामले में निर्णय उसकी परिस्थितियों और तथ्यों के आधार पर किया जाना चाहिए |

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5.Failed Romantic Relationship और विवाह का झूठा वादा

भारत में लगातार ऐसे मामले बढ़ रहे हैं जिनमे किसी व्यक्ति द्वारा विवाह का झूठा झांसा देकर प्रेम सम्बन्ध स्थापित किये, लेकिन विवाह की मांग करने पर विवाह से इंकार कर दिया जाता है |

जब ऐसे प्रेम सम्बन्ध टूट जाते हैं, तो अक्सर समस्या खड़ी हो जाती है कि क्या इसे failed romantic relationship माना जाएगा या इसे अपराध की श्रेणी में सुमार किया जाएगा ? इसके उत्तर के लिए न्यायालयों के निर्णयों का अवलोकन आवश्यक है |

यदि किसी व्यक्ति ने शुरुआत से ही विवाह का झूठा वादा करके शारीरिक सम्बन्ध स्थापित किये हैं तो इसे न्यायालय गंभीरता से लेते हैं और इसमें जांच की जाती है कि झूठा वादा पहले किया गया या शारीरिक सम्बन्ध बनाने की अनुमति पहले दी गई |

यदि झूठा वादा पहले किया गया तथा उसके बाद शारीरिक सम्बन्ध बनाये गए तो यह मामला गंभीर अपराध की श्रेणी में आ जाता है, लेकिन शारीरिक सम्बन्ध पहले बनाये गए और विवाह का वादा बाद में किया गया तथा समय गुजरने के बावजूद किसी भी तरह आपत्ति या शिकायत दर्ज नहीं कराई जाती है, तब यह अपराध की श्रेणी से बाहर हो जाता है |

कई बार ऐसा भी होता है कि दो व्यक्तियों के बीच सम्बन्ध आपसी प्रेम और विश्वास के आधार पर पनपते हैं और विवाह की संभावनाएं भी होती हैं, लेकिन किसी कारण से सम्बन्ध टूट जाते हैं, ऐसी स्थति में अपने आप अपराध सिद्ध नहीं होता है |

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6. अदालत किन तथ्यों पर निर्णय करती है?

(i)क्या संबंध आपसी सहमति से बना था?

Failed Romantic Relationship और विवाह का झूठा वादा किये जाने के सम्बन्ध में अदालतें देखती हैं कि क्या दोनों लोगों के बीच बने प्रेम सम्बन्ध आपसी सहमति का परिणाम हैं ?

न्यायालय में यह पाया जाता है कि दोनों के बीच सम्बन्ध आपसी सहमति का परिणाम है, तो न्यायालय आरोपित को डिस्चार्ज कर सकती हैं |

(ii)क्या विवाह का वादा शुरू से झूठा था?

विवाह का वादा कर शारीरिक सम्बन्ध बनाने के आरोप में अदालतें देखतीं हैं कि क्या वास्तव में विवाह का वादा पहले किया गया और उसके बाद शारीरिक सम्बन्ध बनाये गए ? बावजूद विवाह का वादा पूरा नहीं किया गया |

यदि ऐसा पाया जाता है तो अदालतें इस पर गंभीरता से विचार करती हैं |

(iii)क्या मामला Failed Romantic Relationship का है ?

विवाह का झूठा वादा किये जाने के सम्बन्ध अदालतें देकती हैं कि क्या मामला Failed Romantic Relationship का तो नहीं है ? यदि अदालत पाती है कि मामला Failed Romantic Relationship का है, तो वह आरोपित को कानूनी दायरे में राहत प्रदान कर देती है |

(iv)क्या दोनों पक्ष वयस्क थे?

विवाह का झूठा वादा किये जाने के सम्बन्ध में और Failed Romantic Relationship के मामलो में अदालतें दोनों पक्षों की वयस्कता को भी ध्यान में रखती है और कानूनी कार्यवाही को अंजाम देती हैं |

(v)संबंध की अवधि और परिस्थितियाँ क्या हैं ?

विवाह का झूठा वादा किये जाने के सम्बन्ध में अदालतें झूठा वादा किये जाने के बाद समय और परिस्थितयों को भी ध्यान में रख कर कार्यवाही करती हैं |

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7. समाज और कानून के लिए इसका महत्व

Failed Romantic Relationship से जुड़े विवादों में कानूनी संतुलन अत्यधिक आवश्यक है | क्यों कि Failed Romantic Relationship के मामले सिर्फ पीड़ित और आरोपित को प्रभावित नहीं करते हैं बल्कि ये परिवार और समाज को भी प्रभावित करते हैं | इसलिए ऐसे मामलों में समाज में क़ानून की सही समझ और संतुलित दृष्टिकोण अत्यंत जरूरी है |

क़ानून का सामान्य उद्देश्य होता है कि किसी एक भी निर्दोष को सजा न हो तथा कोई भी अपराधी बच न पाए | इस लिए अदालते हर मामले को उसकी परिस्थितयों और प्रमाणों के सन्दर्भ में सावधानी पूर्वक आंकलन करती हैं |

यदि हर Failed Romantic Relationship को अदालत अपराध मान लें, तो इससे क़ानून के दुरूपयोग की सम्भावनाये बहुत बढ़ जाएगी | इसलिए समाज और क़ानून के लिए इसका बहुत महत्व है |

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8. निष्कर्ष

BNS 2023 के तहत अदालतों का दृष्टिकोण साफ है कि यदि दो वयस्क व्यक्तियों के बीच आपसी सहमति से शारीरिक सम्बन्ध स्थापित होते हैं और बाद में वह सम्बन्ध असफल या टूट जाते हैं, तो केवल Failed Romantic Relationship के आधार पर आरोप स्वतः सिद्ध नहीं होते हैं |

न्यायालय को प्रत्येक मामले में यह देखना होता है कि क्या आरोपित की प्रारम्भ से ही विवाह का झूठा वादा करके धोखे या छल की मंशा थी या सम्बन्ध वास्तव में आपसी सहमति या पारस्परिक विश्वाश पर आधारित था |

इस लिए किसी भी आरोप का निर्णय अलग-अलग मामले के तथ्यों, परिस्थितयों और साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए किया जाता है |

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ):Failed Romantic Relationship और कानून

प्रश्न 1 :Failed Romantic Relationship क्या है ?

उत्तर : Failed Romantic Relationship का अर्थ है कि दो वयस्कों की बीच आपसी सहमति से शुरू हुए आपसी प्रेम सम्बन्ध बाद में किसी कारण से टूट गए हों |

प्रश्न 2 :क्या Failed Romantic Relationship के बाद बलात्कार का मामला बनता है ?

उत्तर : नहीं | Failed Romantic Relationship के बाद बलात्कार का मामला नहीं बनता है | इसमें अदालतें देखती हैं कि सम्बन्ध आपसी सहमति का परिणाम है या सहमति धोखे या छल का से प्राप्त सहमति का परिणाम है |

प्रश्न 3 : विवाह के झूठे वादे पर बने सम्बन्ध को अदालत कैसे देखती है ?

उत्तर : यदि यह साबित हो कि किसी व्यक्ति ने शरू से ही विवाह का झूठा वादा करके धोखा देने के उद्देश्य से ही शारीरिक सम्बन्ध बनाने के लिए सहमति प्राप्त की, तो अदालतें इसे गंभीरता से लेतीं हैं |

प्रश्न 4 :क्या हर Failed Romantic Relationship आपराधिक मामला बन सकता है ?

उत्तर : नहीं | अदालतों ने स्पष्ट किया है कि केवल Failed Romantic Relationship के आधार पर किसी आरोपित को अपराधी नहीं ठहराया जा सकता है |

प्रश्न 5 : विवाह के झूठे वादों के मामले में अदालत का मुख्य उद्देश्य क्या होता है ?

उत्तर : इस प्रकार के मामलों में अदालत का मुख्य उद्देश्य होता है कि वास्तविक विवाह के झूठे वादों के मामलों में न्याय मिले तथा साथ ही क़ानून का दुरुपयोग न हो सके |

अस्वीकरण :

यह लेख केवल शैक्षणिक और जन-जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है | यह किसी विशेष व्यक्ति, संस्था या मामले के लिए कानूनी सलाह नहीं है | अधिक जानकारी के लिये योग्य अधिवक्ता से परामर्श आवश्यक है |

Note: Image credit: AI-generated illustration (created with ChatGPT)

 लेखक

Dr Raj Kumar
Founder- HumanRightsGuru / LawVsReality

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