
प्रस्तावना
Artificial Intelligence (AI) के उपयोग ने आज भारत की न्याय व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है | जहाँ पहले न्यायालयों में सालों तक मुकदद्मे लंबित रहते थे, वहीं अब ADR (Alternative Dispute Resolution) के क्षेत्र में अदालत के बाहर विवाद सुलझाने के प्रमुख वैकल्पिक तरीकों में मध्यस्थता, सुलह, और आर्बिट्रेशन भी आते हैं, का Artificial Intelligence के माध्यम से तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है |
यह कार्य न्याय को तेज, सस्था और सुलभ बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है | Artificial Intelligence ने Alternative Dispute Resolution (ADR) के क्षेत्र में क्रांति ला दी है |
इसके साथ -साथ सरकार डिजिटल अदालतों के संवर्धन पर भी जोर दे रही है | जिसकी निगरानी माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा की जा रही है |
डिजिटल इंडिआ के इस दौर में यह सवाल बहुत महत्वपूर्ण है कि क्या Artificial Intelligence न्याय व्यवस्था को वास्तव में अधिक किफायती और प्रभावशाली बना सकता है | इस लेख में हम न्याय व्यवस्था के भविष्य को बदलते परिदृश्य के रूप में समझने का प्रयास करेंगे |
अदालतों में लंबित पड़े मुकदद्मों के बोझ ने Alternative Dispute Resolution (ADR) के क्षेत्र में Artificial Intelligence उपयोग की संकल्पना को जन्म दिया है | जो भविष्य के न्याय की आधुनिक आधारशिला बनेगी |
यह भी पढ़ें :जनरेटिव एआई और मानवाधिकार: चैटजीपीटी के बढ़ते प्रभाव का विश्लेषण
Artificial Intelligence क्या है ?
Artificial Intelligence एक आधुनिक डिजिटल तकनीक है, जिसका आधार मशीन लर्निग के सिद्धांत पर निर्भर करता है | यह तकनीकी मशीनो को आदमियों की तरह सोचने, समझने और विश्लेषण की क्षमता प्रदान करती है | यह तकनीकी पहले से उपलब्ध डेटा के उपयोग पर आधारित है |
यह भी पढ़ें :भारत में Human Rights और Law: महत्वपूर्ण लेखों की सूची (2024-2026)
न्यायप्रणाली में Artificial Intelligence का उपयोग ?
आजकल Artificial Intelligence का उपयोग कानूनी क्षेत्र में तेजी के साथ बढ़ रहा है | नई पीढ़ी के वकील इसका अनुसरण और उपयोग बहुतायत में कर रहे हैं |
इसके उपयोग से सेकण्ड्स में हजारों- लाखों कानूनी और न्यायिक दस्तावेजों का विश्लेषण हो जाता है | जिसका उपयोग वकील और न्यायाधीश दोनों ही लोग कर सकते हैं |
Artificial Intelligence तकनीकी वकीलों और जजों का बहुमूल्य समय तथा संसाधन बचाने में मददगार साबित हो रही है | यद्यपि पुराणी पीढ़ी के वकील और जजों के लिए यह एक समस्या की तरह हो सकती है लेकिन फिर भी सभी को इस तकनीकी का लाभ लेने के लिए तैयार रहना चाहिए |
Artificial Intelligence से आज न्यायालय पेपरलेस हो रहे हैं जिससे तमाम पेपर बच सकेगा और उसे बनाने के लिए तमाम पेड़ों को काटने की नौबत नहीं आएगी | जो कि भविष्य में अच्छे और स्वच्छ वातावरण के लिए भी अच्छा होगा |
Artificial Intelligence न्याय व्यवस्था के कार्य को अत्यधिक सुगम, सटीक, कम खर्चीला तथा प्रभावी बनाने में अत्यधिक कारगर साबित हो रहा है |
यह भी पढ़ें : Forensic Science और मानव अधिकार: अपराध जांच में वैज्ञानिक साक्ष्यों की 5 महत्वपूर्ण भूमिकाएँ
ADR (Alternative Dispute Resolution) क्या है?
भारत में पारम्परिक न्याय व्यवस्था अत्यधिक खर्चीली और उबाऊ है तथा ADR की उत्पत्ति पारम्परिक न्याय व्यवस्था के विकल्प के रूप में हुई है |
यह न्याय पाने की एक वैकल्पिक व्यवस्था है जिसमे न्यायालय के बाहर ही पक्ष्कारों को न्याय मिल जाता है | उसे किसी न्यायालय में विवाद के समाधान के लिए नहीं जाना पड़ता है |
इसका मुख्य उद्देश्य न्यायालयों में मुकदद्मों के बोझ को काम करना तथा विवादों का तेज, सस्ता तथा भरोसेमंद समाधान प्रदान करना है | इस कार्य के लिए पक्षकारों को न्यायालय के चक्कर नहीं काटने पड़ते हैं | सरकार ने इसके लिए ऑनलाइन प्लेटफार्म स्थापित किये हैं | जो सफलता पूर्वक कार्य कर रहे हैं |
यह भी पढ़ें :TB-मुक्त भारत 2025: स्वास्थ्य मिशन या मानवाधिकार परीक्षा?
भारत में ADR का उद्भभव
वर्ष 1999 से पूर्व विवादों को निपटाने के पारम्परिक तरीके ही अपनाये जाते थे | लेकिन भारत में सबसे पहले नागरिक प्रक्रिया संहिता (CPC) में 1999 में संशोधन कर धारा 89 जोड़ी गई | इस धारा के माध्यम से पह्की बार ADR को कानूनी मान्यता मिली।
माननीय सुप्रीम कोर्ट की विधि व्यवस्था Afcons Infrastructure Ltd. v. Cherian Varkey Construction Co. (P) Ltd. (2010) 8 SCC 24 में स्थापित लिया गया कि किन -किन मामलों को ADR में भेजा जा सकता है |
यह भी पढ़ें : Live-in-Relationship छुपाकर शादी करना धोखा,2026? कोर्ट ने रद्द किया विवाह – जानिए पूरा कानून
मध्यस्थता के लिए उपयुक्त मामले निम्नलिखित हैं:
(i) व्यापार, वाणिज्य और अनुबंधों से संबंधित सभी मामले,
जिनमें शामिल हैं
अनुबंधों से उत्पन्न विवाद (सभी मौद्रिक दावों सहित);
विशिष्ट निष्पादन से संबंधित विवाद;
आपूर्तिकर्ताओं और ग्राहकों के बीच विवाद;
बैंकरों और ग्राहकों के बीच विवाद;
डेवलपर्स/बिल्डरों और ग्राहकों के बीच विवाद;
मकान मालिकों और किरायेदारों/लाइसेंसकर्ता और लाइसेंसधारी के बीच विवाद;
बीमाकर्ता और बीमित व्यक्ति के बीच विवाद;
यह भी पढ़ें : Fake Rape Case in India: सच्चाई जो कम लोग जानते हैं (BNS 2023) | Law vs Reality
(ii) तनावपूर्ण या बिगड़े संबंधों से उत्पन्न सभी मामले,
जिनमें शामिल हैं
वैवाहिक मामलों, भरण-पोषण, बच्चों की अभिरक्षा से संबंधित विवाद;
परिवार के सदस्यों/सह-भागीदारों/सह-मालिकों के बीच विभाजन/बंटवारे से संबंधित विवाद; और
साझेदारों के बीच साझेदारी से संबंधित विवाद।
यह भी पढ़ें :₹3 लाख या न्याय? Acid Attack Compensation का सच | Law vs Reality (India 2026)
(iii) वे सभी मामले जिनमें विवादों के बावजूद पूर्व-स्थापित संबंध को जारी रखने की आवश्यकता हो,
जिनमें शामिल हैं:
पड़ोसियों के बीच विवाद (सुविधा अधिकारों, अतिक्रमणों, उपद्रव आदि से संबंधित);
नियोक्ताओं और कर्मचारियों के बीच विवाद;
सोसाइटियों/संघों/अपार्टमेंट मालिकों के संघों के सदस्यों के बीच विवाद;
(iv) अपकृत्य दायित्व से संबंधित सभी मामले
जिनमें शामिल हैं
मोटर दुर्घटनाओं/अन्य दुर्घटनाओं में मुआवजे के दावे; और
यह भी पढ़ें :अब बच नहीं पाएंगे अपराधी! Forensic Science से बदल रही है UP की पूरी जांच प्रणाली!2026
(v) सभी उपभोक्ता विवाद
जिनमें शामिल हैं
ऐसे विवाद जिनमें कोई व्यापारी/आपूर्तिकर्ता/निर्माता/सेवा प्रदाता अपनी व्यावसायिक/पेशेवर प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता या उत्पाद की लोकप्रियता को बनाए रखने के लिए उत्सुक होता है।
यह भी पढ़ें :Top Human Rights Articles हर भारतीय नागरिक को पढ़ने चाहिए (2026 गाइड)
ऑनलाइन विवाद समाधान (ODR) क्या है ?
विवाद सुलझाने के लिए तकनीकी समर्थित विधियों के उपयोग को ऑनलाइन विवाद समाधान (ODR) कहते हैं | यह पारम्परिक कानूनी प्रक्रिया से भिन्न है तथा पक्षों को तकनीकी समर्थित विधियों के उपयोग द्वारा विवादों को सुलझाने में समर्थ बनाता है |
यह भी पढ़ें :क्या धारा 498A का दुरुपयोग हो रहा है? — Law vs Reality
ऑनलाइन विवाद समाधान पोर्टल
भारत में ऑनलाइन विवाद समाधान (ODR) पोर्टल को लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा बनाया गया है | यह पोर्टल सूक्ष्म और लघु उद्योगों (MSME) के लिए बनाया गया है |
जहाँ लोग अपने घर या ऑफिस में बैठकर ही अपने विलंबित भुगतान(Delayed Payment) विवाद का समाधान पा सकते हैं | इससे समाधान आसानी, तेजी और प्रभावी ढंग से मिल जाता है |
इस ऑनलाइन विवाद समाधान (ODR) पोर्टल का उद्देश्य न्याय तक लोगो की आसान पहुंच उपलब्ध कराना है | यह विवादों को पूरी तरह डिजिटल तरीके से सुलझाता है |
ऑनलाइन विवाद समाधान पोर्टल का उद्देश्य
MSME ODR पोर्टल का उद्देश्य सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए सरल और तेज न्याय दिलाना है तथा इसकी विशेषताएं निम्न प्रकार हैं
(1 ) e -फाइलिंग और केस मैनेजमेंट;
(2) ऑनलाइन सुलह/मध्यस्थता;
(3) ऑनलाइन मध्यस्थता;
(4) वर्चुअल सुनवाई;
(5 ) कानूनी सहायता डेस्क |
AI और ADR के संगम से तेज़ और सस्ता न्याय कैसे ?
Artificial Intelligence और Alternative Dispute Resolution का मिलान न्याय व्यवस्था को अधिक सुगम, सस्ती,तेज और प्रभावी बना रहा है | AI कुछ ही समय में हजारों विधि व्यवस्थाओं और कानूनी डेटा का विश्लेषण करने में सक्षम होता है जिससे सेकंड में हजारों दस्तावेजों का विश्लेषण कर सकता है, के माध्यम से विवादों को सुलझाने में तीब्रता आती है | जिससे mediation, arbitration तथा reconciliyetion के माध्यम से समाधान तेजी से निकलता है |
यही नहीं डिजिटल प्लेटफॉर्म के कारण अधिवक्ता और पक्षकारों का यात्रा खर्च कम हो जाता है | इस न्याय व्यवस्था के कारण छोटे मामलों का निपटारा बिना कोर्ट में जाए हो जाता है। ODR प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोग घर या ऑफिस में बैठ कर ही अपने विवादों का निपटारा कर सकते हैं |
Virtual Courts क्या हैं और कैसे काम करते हैं?
वर्चुअल कोर्ट वे अदालतें हैं जिनमे मुकदद्मों की सुनवाई डिजिटल उपकरणों या कॉन्फ्रेंसिंग के उपयोग से सुनिश्चित की जाती है |इसमें न्यायाधीश, वकील तथा पक्षकार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये एक दुसरे से जुड़ते हैं | सुप्रीम कोर्ट ने भी इ-कोर्ट प्रोजेक्ट, वर्चुअल हियरिंग को बढ़ावा दिया है | इसके अतिरिक्त नए कानून में भी वर्चुअल कोर्ट को महत्व दिया गया है |
भारतीय न्याय व्यवस्था में Artificial Intelligence :जोखिम, चुनौतियाँ और हालिया न्यायिक चेतावनी
भारतीय न्याय व्यवस्था में जहां एक ओर Artificial Intelligence न्याय व्यवस्था को तेजी, सुगमता तथा पारदर्शिता प्रदान कर रहा है ,वहीं इसके दुरूपयोग से जुड़े गंभीर जोखिम भी दृश्टिगोचर होने लगे हैं |
हाल ही में बॉम्बे हाई कोर्ट का एक महत्वपूर्ण विवाद सामने आया, जिसमे बिना सत्यापन के Artificial Intelligence के उपयोग से अस्तित्वहीन विधि व्यवस्था न्यायालय के समक्ष लिखित रूप में दाखिल की गई |
इस प्रकार का उपयोग न्याय प्रक्रिया,वकील और मुबकिल के लिए खतरनाक हो सकता है | इसको न्यायलय ने पेशेवर लापरवाही माना तथा वकील पर 50 हजार का जुर्माना भी लगाया |
अदालत ने यह भी कहा कि Artificial Intelligence का उपयोग वर्जित नहीं है, लेकिन उसका उपयोग जिम्मेदारी से किया जाना चाहिए | वकील का यह आचरण न केवल न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करता है, बल्कि पक्षकार के मामले को भी कमजोर कर सकता है।
इसी संदर्भ में हाल ही में Supreme Court of India ने भी Artificial Intelligence-generated सामग्री को लेकर चिंता व्यक्त की है। Gummadi Usha Rani & Anr. v. Sure Mallikarjuna Rao & Anr. में न्यायालय ने ऐसे कृत्यों को गंभीर कदाचार मानते हुए चेतावनी दी कि इसके गंभीर कानूनी परिणाम हो सकते हैं।
उक्त उदाहरणों से स्पष्ट है कि न्याय व्यवस्था के क्षेत्र में Artificial Intelligence का उपयोग सहायक के रूप में तो किया जा सकता है, लेकिन वह न्याय व्यवस्था में पुलिस ,अधिवक्ता या न्यायाधीश का विकल्प नहीं बन सकता है |
बिना मानवीय सत्यापन के Artificial Intelligence के उपयोग से न्यायिक कार्य न सिर्फ वकील को शर्मिन्दा कर सकता है बल्कि सम्पूर्ण न्याय व्यवस्था से वादकारियों का विश्वास भी उठ सकता है | यही नहीं वकीलों को न्यायाधीशों के गुस्से तथा कार्यवाही का भी सामना करना पड़ सकता है |
यह भी पढ़ें : Consent vs Misuse in Rape Law India: Supreme Court के 5 बड़े फैसले!
निष्कर्ष
Artificial Intelligence, ADR तथा वर्चुअल कोर्ट मिलकर भारत की न्याय व्यवस्था को सस्ता, सुलभ तथा तेज बनाने की दिशा नई क्रांतिकारी बदलाव ला रहे हैं | इस डिजिटल तकनीकी के उपयोग से परम्परागत न्याय प्रणाली की अपेक्षा अधिक प्रभावी तथा समयबद्ध तरीके से विवादों का निपटारा संभव हो पा रहा है |
यद्यपि, इस बदलाव के साथ-साथ न्याय की पारदर्शिता, संवैधानिक मूल्यों तथा मानव अधिकारों की रक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण और आवश्यक है जितना नई तकनीकी को आत्मसात करना | बिना मानवीय निगरानी तथा हस्तक्षेप के Artificial Intelligence पर आँख मूद कर भरोसा करना न्याय व्यवस्था के लिए जोखिम भरा हो सकता है |
इस लिए Artificial Intelligence का ADR में संतुलित उपयोग पूरी मानवीय जिमेदारी से करना आवश्यक है जिससे किसी अन्याय की उम्मीद पैदा न हो सके तथा आधुनिक तकनीकी के साथ निष्पक्ष तथा सुरक्षित न्याय व्यवस्था सुनिश्चित हो सके | स्पष्ट है कि भारत में Artificial Intelligence अब सिर्फ एक तकनीकी भर नहीं रही है बल्कि भविष्य के न्याय की आधारशिला बन चुकी है |
यह भी पढ़ें : Live-in-Relationship छुपाकर शादी करना धोखा,2026? कोर्ट ने रद्द किया विवाह – जानिए पूरा कानून
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs):
प्रश्न 1. Alternative Dispute Resolution (ADR) क्या होता है?
उत्तर : यह एक वैकल्पिक न्याय प्रणाली है, जिसके द्वारा विवादों को अदालत के बाहर Mediation, Arbitration और Conciliation के माध्यम से सुलझाया जाता है।
प्रश्न 2. Artificial Intelligence (AI) की ADR में क्या भूमिका है ?
उत्तर : Artificial Intelligence के माध्यम से ADR प्रक्रिया तेज़ और अधिक प्रभावी बनती है।
प्रश्न 3. क्या Artificial Intelligence न्याय प्रक्रिया को तेज़ बना सकता है?
उत्तर : हाँ, यह सेकंड्स में डेटा analyze करके मामलों के निपटारे की गति बढ़ाता है और लंबित मामलों को कम करने में सहायक है।
प्रश्न 4. Online Dispute Resolution (ODR) क्या है?
उत्तर : ODR एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जहाँ लोग अपने विवादों को ऑनलाइन ADR के जरिए बिना कोर्ट में जाए सुलझा सकते हैं।
प्रश्न 5. क्या Artificial Intelligence पूरी तरह जज की जगह ले सकता है?
उत्तर : नहीं, AI केवल एक सहायक उपकरण के रूप में सहायता करता है। अंतिम निर्णय अभी भी न्यायाधीश द्वारा ही लिया जाता है।
यह भी पढ़ें : Failed Romantic Relationship: क्या संबंध टूटने पर बनता है बलात्कार का केस? BNS 2023
Reference
- Gummadi Usha Rani & Anr vs Sure Mallikarjuna Rao & Anr,Special Leave to Appeal (C) No(s). 7575/2026
- Mahipal Singh Rana v. State of Uttar Pradesh, (2016) 8 SCC 335
- “AI से वकालत करना पड़ा महंगा! बॉम्बे हाईकोर्ट ने ठोका ₹50,000 का जुर्माना”
- Mediation and Conciliation Committee, Available at https://mcpc.nic.in/?100014, Accessed on 28/04/2026
- India’s SC warns against unsupervised AI use in rulings, Available at https://law.asia/ai-judicial-decisions/, Accessed on 28/04/2026
- Online Dispute Resolution (ODR) portal. Available at https://odr.msme.gov.in/Accessed on 28/04/2026
अस्वीकरण :
यह पेज केवल शैक्षणिक और जन-जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है | यह किसी विशेष व्यक्ति, संस्था या मामले के लिए कानूनी सलाह नहीं है | 498A पर अधिक जानकारी के लिये योग्य अधिवक्ता से परामर्श आवश्यक है |
Note: Image credit: AI-generated illustration (created with ChatGPT)
लेखक
Dr Raj Kumar
Founder- HumanRightsGuru / LawVsReality