Fake Rape Case in India: सच्चाई जो कम लोग जानते हैं (BNS 2023) | Law vs Reality

Fake rape case in India concept thumbnail showing bold Hindi text “सच्चाई जो कम लोग जानते हैं” with Law vs Reality theme, justice symbol, and false allegation warning visuals
क्या हर आरोप सही होता है? जानिए कानून और जमीनी हकीकत का असली सच

प्रस्तावना

क्या भारत में fake rape case वास्तव में चिंता का विषय है, या यह सिर्फ एक परिकल्पना है ? भारत मे rape के मामलो को अत्यधिक गंभीर किस्म के अपराध की श्रेणी में रखा गया है |

महिलाओं के विरुद्ध बढ़ते यौन अपराधों के चलते महिला सुरक्षा सम्बन्धी कानूनों को लगातार कठोर से कठोर बनाया जा रहा है, जिससे महिलाओं का सम्मान तथा सुरक्षा सुनिश्चित हो सके तथा अपराधियों को कठोर से कठोर दंड मिल सके |

परन्तु पिछले कुछ वर्षों से न्यायालयों के समक्ष ऐसे मामले भी आए हैं, जिसमें बलात्कार के सम्बन्ध में झूठे आरोप लगाए गए थे तथा सहमति से बने संबंधों को बाद में बलात्कार का रूप दे दिया गया था | क्या जानबूझ कर तथा षड़यंत्र के तहत लगाए जाने वाले fake rape case भी आपराधिक न्याय व्यवस्था के लिए चिंता का विषय नहीं हैं ?

न्यायालयों के समक्ष आए इस प्रकार के मामलों ने आपराधिक न्याय प्रणाली के समक्ष एक गंभीर तथा महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा कर दिया है | क्या असफल प्रेम सम्बन्ध या पूर्व में बनाए गए सहमति से संबंधों को या विवाह का झूठा वादा करके बनाए गए संबंधों के टूटने के बाद उसे बलात्कार माना जा सकता है ?

नए कानून BNS 2023 के तहत fake rape case एक चुनौती के रूप में उभरकर सामने आ रहे हैं, जिन पर कानूनी और सामाजिक दोनों दृष्टिकोणों से चर्चा जरूरी है। जब हम law vs reality India की बात करते हैं, तो साफ दिखता है कि कागज पर कानून और असल जिंदगी में कानून दोनों अलग चीजें हैं |

इस लेख में rape law in India explained के माध्यम से हम समझेंगे कि भारतीय कानून इस संवेदनशील मुद्दे को किस तरह से देखता है। इस लेख में जानें कानून और हकीक़त की पूरी सच्चाई |

इस पोस्ट को पढ़ने के लिए धन्यवाद, सब्सक्राइब करना न भूलें!

यह भी पढ़ें : भारत में Human Rights और Law: महत्वपूर्ण लेखों की सूची (2024-2026)

Rape सम्बंधित कानूनी ढाँचा

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 63 में बलात्संग को परिभाषित किया गया है तथा 64 में बलात्संग के लिए दंड का प्रावधान किया गया है |

जिसमे सजा का प्रावधान 10 वर्ष से कम नहीं होगा, परन्तु, जो आजीवन कारावास तक हो सकेगा और यह जुर्माने से भी दंडनीय है | इसमें अपवाद स्वरूप स्पष्ट किया गया है कि किसी चिकित्सकीय परीक्षा या हस्तक्षेप से बलात्कार का अपराध गठित नहीं होता है |

बलात्कार के सम्बन्ध में दंड की एक और श्रेणी बनाई गई है जिसके अनुसार यदि कोई किसी 12 वर्ष से कम आयु की किसी महिला से सम्बन्ध बनाता है तो वह कठिन कारावास से जिसकी अवधि 20 वर्ष से कम नहीं होती है, किन्तु जो आजीवन कारावास, जिसका अभिप्राय उस व्यक्ति के शेष प्राकृतिक जीवन काल के लिए कारावास तक की हो सकती है तथा जुर्माने से भी दण्डित किया जा सकता है तथा इसमें मृत्यु दंड का भी प्रावधान है |

भारतीय न्याय संहिता, 2023 में मैथुन क्रिया के सम्बन्ध में नया प्रावधान जोड़ा गया है,यह प्रावधान सेक्शन 69 के तहत जोड़ा गया है|

इस प्रावधान में परिभाषित किया गया है कि जो कोई प्रवंचना पूर्ण साधनो द्वारा या किसी महिला को विवाह का वचन देकर, उसको पूरा करने के किसी आशय के बिना उसके साथ मैथुन करता हैं | तो ऐसा मैथुन बलात्कार की कोटि में नहीं आता है |

इस प्रावधान में प्रवंचाना पूर्ण साधनो को स्पष्ट करते हुए विशेष रूप से तीन बिंदु दिए गए हैं |

ये इस प्रकार हैं :
1 .नियोजन या प्रोन्नति के बहाने प्रवंचना करना |
2 .पहचान छिपाकर विवाह करने के लिए प्रवंचना करना
3 .उत्प्रेरण या उसका मिथ्या वचन करना |

इस प्रावधान के तहत दस वर्ष के कारावास का दंड और जुर्माना भी हो सकता है | भारत में न्यायालय भी fake rape case के सम्बन्ध में अत्यधिक चौकन्ने हैं |

भारत में fake rape case india जैसे मामलों पर लगातार बहस हो रही है, जहां कानून और जमीनी सच्चाई के बीच बड़ा अंतर देखने को मिलता है।

यह भी पढ़ें : POCSO कानून का दुरुपयोग: ‘Romeo–Juliet’ Clause क्यों बनी मानवाधिकार आवश्यकता ?

Fake rape case क्या हैं ?

Fake rape case से तात्पर्य है कि जब किसी व्यक्ति के विरुद्ध लगाया गया rape का आरोप प्रथम दृष्ट्या निर्मित ही नहीं होता है या जांच तथा अदालत में साबित नहीं होता है |

BNS 2023 के अनुसार कई स्थतियों में लैंगिक कृत्य बलात्कार की श्रेणी में नहीं रखा जाता है | इस नए अपराध के लिए नई विधि BNS 2023 में नई धारा 69 को जोड़ा गया है | इसमें विशेष परिस्थितयों में किये गए लैंगिक कृत्य को rape नहीं माना गया है,बल्कि नए अपराध के रूप में जोड़ा गया है | यद्धपि Fake rape case को भारतीय क़ानून में कही भी परिभाषित नहीं किया गया है |

यह भी पढ़ें : Live-in-Relationship छुपाकर शादी करना धोखा,2026? कोर्ट ने रद्द किया विवाह – जानिए पूरा कानून

Rape और सहमति से यौन संबंध में क्या अन्तर है ?

Fake rape case केस को स्पष्ट रूप से समझने के लिए rape और सहमति से सम्बन्ध में अन्तर को साफ़ -साफ़ समझना अत्यधिक आवश्यक है | बलात्कार वह स्थिति है जब किसी व्यक्ति के साथ उसकी इच्छा के विरुद्ध या बिना उसकी वैध सहमति के यौन संबंध बनाया जाता है। यह एक गंभीर अपराध है |

सहमति से सम्बन्ध का मतलब है कि व्यक्ति ने स्वेच्छा से, बिना दबाव के, पूरी समझ के साथ यौन संबंध के लिए हाँ कहा हो। भारतीय दंड कानूनों के तहत दो प्रौढ़ व्यक्तियों के बीच सहमति से स्थापित यौन संबंधों को किसी अपराध के दायरे में नहीं रखा गया है अर्थात सहमति से स्थापित यौन संबंधों को अपराध नहीं माना गया है |

लेकिन अनेक मामलों में दो व्यक्तियों के बीच सहमति से स्थापित संबंधों को बाद में किसी भी कारण से बलात्कार के आरोप में बदलने के मामले सामने आए हैं | जो न्यायालयों में विचारण के बाद rape के अपराध के रूप में सिद्ध नहीं हो पाए हैं | अंततः उनका अंजाम fake rape case के रूप में सामने आया है |

यदि घटना के समय अगर व्यक्ति नाबालिग (18 वर्ष से कम आयु का) है, तो उसकी सहमति का कानूनी रूप से कोई महत्व नहीं होता है |

यह भी पढ़ें : रु 54,000 करोड़ का Digital Fraud: Supreme Court ने क्यों कहा “लूट या डैकेती”?

Fake rape case सम्बंधित न्यायिक दृष्टिकोण

Agra में 24 जून 2022 को एक rape केस दर्ज हुया | प्राथमिक जांचपड़ताल के बाद पुलिस ने 6 जुलाई को एक महिला और तीन वकीलों को गिरफ्तार कर लिया |

इन सभी के विरुद्ध Fake rape case मामले 5 लाख रूपये की वसूली का आरोप था | जांच में पुलिस को पता चला कि यह rape का नहीं बल्कि उगाही का मामला था | पुलिस द्वारा उनके पास से ₹3.75 लाख नकद भी बरामद किए गए।

Fake rape case के बढ़ते मामलो के पीछे कोई एक कारण जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि न्याय निर्णयों से कई कारण सामने आये हैं |इस सम्बन्ध में कुछ दृष्टांत नीचे दिए गए हैं |

यह भी पढ़ें : Failed Romantic Relationship: क्या संबंध टूटने पर बनता है बलात्कार का केस? BNS 2023

सनोज् कुमार मिश्रा बनाम् राज्य तथा अन्य ,जमानत प्रर्थाना पत्र संख्या 1672/2025,दिल्ली उच्च न्यायालय

वर्ष 2025 मे सनोज् कुमार मिश्रा बनाम् राज्य तथा अन्य के जमानत प्रर्थाना पत्र संख्या 1672/2025 निर्णीत दिनाँक 30 /05 /2025 के मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने बलात्कार के प्रावधानों का दुरूपयोग करने पर चिंता व्यक्त की | न्यायालय ने कहा कि झूठी FIR (Fake rape case ) कराने वाली ऐसी महिलाओं के विरुद्ध कठोर कार्यवाही करनी चाहिए |

यह मामला एक फिल्म निर्देशक के साथ काम करने वाली महिला से जुड़ा है | पहले उसने फिल्म निर्देशक के साथ काम किया और बाद में उसने आरोप लगाया कि उसके साथ नशीला पदार्थ खिला कर बलात्कार किया गया था |

बाद में यह पता चला कि लम्बे समय से वह उसके साथ लाइव इन रिलेशन में रह रही थी तथा उसने हीरोइन का रोल पाने के उद्देश्य से आरोप लगाए थे | पीड़िता बाद में अपने आरोपों से मुकुर गई |

इस पर माननीय अदालत ने कहा कि,
“11. यह एक और ऐसा मामला है, जो यौन अपराधों की झूठी शिकायतें दर्ज कराने के हालिया चलन को दर्शाता है। यौन अपराधों की हर झूठी शिकायत न केवल आरोपी व्यक्ति को भारी नुकसान पहुँचाती है, बल्कि पूरे समाज में निराशा और अविश्वास भी पैदा करती है; जिसके परिणामस्वरूप यौन अपराधों के असली पीड़ितों को भी भुगतना पड़ता है, क्योंकि समाज उनकी सच्ची शिकायतों को भी झूठा समझने लगता है। ऐसी झूठी शिकायतों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए।”

यह भी पढ़ें : Delhi Excise Policy Case में Kejriwal Discharge 2026: मानवाधिकार दृष्टि

राज्य बनाम परमानंद गुप्ता एवं अन्य, सत्र वाद संख्या 1008/2025, विशेष न्यायालय SC /ST एक्ट,लखनऊ

अधिवक्ता Parmanand Gupta को लखनऊ की विशेष अदालत ने SC/ST Act का दुरुपयोग करने तथा झूठे रेप केस दर्ज कराने के अपराध में उम्रकैद की सजा सुनाई है।

अभियोजन के अनुसार Parmanand Gupta ने एक महिला के साथ मिलकर साजिसन बलात्कार के मुकदद्मे दर्ज कराए | अभियुक्त प्रमोद गुप्ता को अंतर्गत धारा 217, 248 BNS तथा SC/ST Act की संबंधित धाराओं में दोषी ठहराया गया।

अदालत ने पाया कि अभियुक्त का उद्देश्य विरोधियों को झूठे मुकदद्मों में फ़साना तथा परेशान करना था |

इस मामले में महिला को सरकारी गवाह बनने तथा अभियुक्त द्वारा उसे गुमराह किये जाने के कारण बरी कर दिया गया, हालांकि अदालत ने यह भी चेतावनी दी कि भविष्य में Fake rape case दर्ज कराकर ऐसे क़ानून का दुरूपयोग किया तो सख्त कार्यवाही की जाएगी |

यह भी पढ़ें : Femicide: महिलाओं के मानवाधिकारों पर सबसे खतरनाक हमला |

शिव शंकर @शिवा बनाम कर्नाटका राज्य और अन्य

सर्वोच्च न्यायालय की विधि व्यवस्था शिव शंकर @शिवा बनाम कर्नाटका राज्य और अन्य , (2019)18 SCC 204 में एक महिला द्वारा अन्य व्यक्ति पर शादी के कथित वादे को तोड़ने के आधार पर बलात्कार का आरोप लगाया था | जिसके सम्बन्ध में प्रथम सूचना दर्ज की गई थी |

इस मामले में न्यायालय में पीड़िता ने स्वीकार किया कि वह आरोपी के साथ 8 वर्षों की लंबी अवधि तक एक विवाहित जोड़े के रूप में रही थी।

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पीड़िता के आरोपों के सम्बन्ध में कहा कि इसे बलात्कार नहीं माना जा सकता है | इसी आधार पर सर्वोच्च न्यायालय ने आपराधिक कार्यवाही निरस्त कर दी |

इस प्रकार के अनेक fake rape case के मामलों में न्यायालय ने गंभीरता पूर्वक मूल्यांकन कर निर्दोषों को राहत की साँस दी है| Consent law India के अनुसार consent इस तरह के मामलों में सबसे अहम भूमिका निभाती है, जिसे समझना हर व्यक्ति के लिए जरूरी है।

यह भी पढ़ें : डिजिटल अरेस्ट : मानव अधिकारों पर एक अदृश्य हमला

उदय बनाम कर्नाटक राज्य

Fake Rape Case के सम्बन्ध में सर्वोच्च न्यायालय की विधि व्यवस्था उदय बनाम कर्नाटक राज्य द्वारा स्थापित किया गया है कि यदि दो लोगो के मध्य सम्बन्ध सहमति से बनता है और बाद में उसे बलात्कार का रूप दिया जाता है तो प्रत्येक परिस्थिति में इसे बलात्कार नहीं माना जा सकता है |

Fake Rape Case के मामलों में देखा गया है कि कई बार व्यक्तिगत कारणों से भी कानून का दुरुपयोग किया जाता है, जिससे निर्दोष लोगों को नुकसान होता है।

यह भी पढ़ें :प्रेम के नाम पर पॉक्सो से मुक्ति: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

जग्गनाथ बिट्ठलू बनाम उड़ीसा राज्य

उड़ीसा उच्च न्यायालय के विधि व्यवस्था जग्गनाथ बिट्ठलू बनाम उड़ीसा राज्य ,2024 क्रिमिनल लॉ जर्नल 1422 में एक आरोपी ने कथित तौर पर शादी का झांसा देकर पीड़िता के साथ यौन संबंध बनाए।

किसी महिला को धोखा देने के इरादे से किया गया शादी का झूठा वादा ही, तथ्यों की गलतफहमी के आधार पर ली गई महिला की सहमति को अमान्य ठहरा सकता है; लेकिन केवल वादे का टूट जाना ही, उसे ‘झूठा वादा’ नहीं कहा जा सकता।

पीड़िता ने बयान दिया कि आरोपी ने उससे शादी करने का वादा किया था, और वह पाँच साल की अवधि तक, नियमित अंतराल पर और अलग-अलग जगहों पर, आरोपी के साथ यौन संबंध बनाती रही।

यह बात मानने योग्य नहीं है कि पीड़िता की सहमति तथ्यों की गलतफहमी के आधार पर ली गई थी। यह ऐसा मामला नहीं था जिसमें शुरुआत में ही शादी का वादा किया गया हो, और पीड़िता यौन संबंधों की प्रकृति और उसके परिणामों से पूरी तरह अवगत थी।

इसलिए, आरोपी को बलात्कार का दोषी नहीं ठहराया जा सकता है | अदालत ने उसकी दोषसिद्धि को रद्द कर दिया | इस प्रकार इस fake rape case का अदालत द्वारा पटाक्षेप किया गया |

यह भी पढ़ें : इंसान वही, हक अलग क्यों? कब मिलेगा LGBTQ+ को विवाह का अधिकार! 

निष्कर्ष

भारत में Fake rape case का विषय बेहद संवेदनशील और जटिल है | एक तरफ महिलाओं की सुरक्षा के लिए लगातार कानून को कठोर बनाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ मामलों में इसके दुरूपयोग की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है |

नए आपराधिक कानून BNS के मामले में Fake rape case का मुद्दा और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, कि हम क़ानून और वास्तविकता के अंतर को समझें | क़ानून की किताबों में कानून न्याय और सुरक्षा की गारंटी देता है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ अलग है |

यह मानना कि हर केस झूठा है, उतना ही गलत है जितना कि यह मान लेना कि हर केस सच्चा है | इस लिए हर मामले की निष्पक्ष तथा गहरी जांच होनी चाहिए, जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए |

यानी हर मामले में सत्य की खोज होनी चाहिए, जिससे पीड़ित को न्याय मिल सके तथा अपराधी को उचित दंड मिल सके और निर्दोष की मुक्ति हो सके |

Fake rape case मामलों को भारतीय न्याय व्यवस्था में गंभीरता से लेना चाहिए तथा उनका मूल्यांकन गहनता से किया जाना चाहिए | Fake rape case न सिर्फ समाज बल्कि न्याय व्यवस्था के लिए भी गंभीर चुनौती हैं |

आखिरकार आपराधिक न्याय प्रणाली का उद्देश्य केवल अपराधियों को सजा देना नहीं है, बल्कि सत्य की खोज करना तथा पीड़ित और आरोपी दोनों के अधिकारों की रक्षा करना है |

यह भी पढ़ें : भारत में फर्जी विश्वविद्यालयों पर कार्रवाई: पूरी सूची और UGC रिपोर्ट

अस्वीकरण :

यह लेख केवल शैक्षणिक और जन-जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है | यह किसी विशेष व्यक्ति, संस्था या मामले के लिए कानूनी सलाह नहीं है | अधिक जानकारी के लिये योग्य अधिवक्ता से परामर्श आवश्यक है |

Note: Image credit: AI-generated illustration (created with ChatGPT)

 लेखक

Dr Raj Kumar
Founder- HumanRightsGuru / LawVsReality

Leave a Comment